दादा का सपना पूरा कर प्रदेश टॉपर बनी गीतिका, सफलता के पल में छलके जज़्बात

बागेश्वर। उत्तराखंड बोर्ड इंटरमीडिएट परीक्षा परिणाम में इस बार एक भावुक और प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। बागेश्वर की होनहार छात्रा गीतिका पंत ने प्रदेश में टॉप कर अपने परिवार का नाम रोशन किया है, लेकिन इस सफलता के पल में एक कमी साफ महसूस हुई—उनके दादा केवलानंद पंत, जिनका सपना उन्होंने पूरा किया, आज इस दुनिया में नहीं हैं।

पिछले वर्ष जब गीतिका ने हाईस्कूल में जिला टॉप किया था, तब उनके बीमार दादा बेहद खुश हुए थे। कांपते हाथों से उन्होंने पोती का मुंह मीठा कराया और उसे आगे और बड़ी सफलता हासिल करने का आशीर्वाद दिया था। इस बार गीतिका ने प्रदेश टॉप कर उनका सपना पूरा तो कर दिया, लेकिन वह इस खुशी को देखने के लिए जीवित नहीं रहे।

गीतिका अपने दादा के बेहद करीब थीं। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने उनकी सेवा में कोई कमी नहीं छोड़ी। खाना खिलाने से लेकर उनकी देखभाल तक, हर जिम्मेदारी उन्होंने निभाई। बीते वर्ष दो अगस्त को दादा के निधन के बाद परिवार को चिंता थी कि इसका असर उनकी पढ़ाई पर पड़ेगा, लेकिन गीतिका ने अपनी मजबूत इच्छाशक्ति से इस दुख को अपने लक्ष्य के बीच नहीं आने दिया।

दादा के जाने के बाद वह रोज उनकी तस्वीर के सामने प्रणाम कर पढ़ाई करती रहीं। परीक्षा परिणाम घोषित होने पर भी उन्होंने सबसे पहले दादा की तस्वीर के आगे सिर झुकाया। बधाई देने पहुंचे लोगों के बीच दादा का जिक्र होते ही गीतिका भावुक हो उठीं और बोलीं—काश आज दादा होते, तो अपने हाथों से मिठाई खिलाकर आशीर्वाद देते।

गीतिका की मां रीता पंत ने बताया कि परिवार को आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा। उनके पिता टैक्सी चालक हैं, जो काम के कारण बच्चों को अधिक समय नहीं दे पाते थे। समाज के तानों के बावजूद माता-पिता ने बच्चों की शिक्षा पर कभी समझौता नहीं किया।

भावुक होकर रीता पंत ने कहा कि आज बेटी की सफलता ने उन सभी सवालों का जवाब दे दिया है, जो कभी समाज ने उनसे पूछे थे।