


देहरादून:
उत्तराखंड की इंजीनियरिंग इकाइयों और उद्योगों में कार्यरत श्रमिकों के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए न्यूनतम वेतन में वृद्धि कर दी है। इस निर्णय के बाद अब राज्य के श्रमिकों को उत्तर प्रदेश समेत कई अन्य राज्यों की तुलना में अधिक वेतन मिलेगा।
दरअसल, ऊधमसिंह नगर के जिलाधिकारी ने 18 अप्रैल को श्रमिक संगठनों और उद्योग प्रतिनिधियों से प्राप्त ज्ञापन के आधार पर श्रमायुक्त को स्थिति से अवगत कराया था। ज्ञापन में श्रमिकों के शोषण और न्यूनतम वेतन में वृद्धि की मांग के साथ औद्योगिक अशांति की आशंका जताई गई थी। अधिकारियों ने चेतावनी दी थी कि यदि वेतन नहीं बढ़ाया गया तो नोएडा जैसी स्थिति यहां भी उत्पन्न हो सकती है।

इस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए श्रमायुक्त पी.सी. दुम्का ने शासन को रिपोर्ट भेजी। शासन ने पाया कि लगभग 20 साल पुरानी अधिसूचना के चलते जीवनयापन की बढ़ती लागत के बावजूद श्रमिकों की क्रयशक्ति घट रही थी, जिससे असंतोष बढ़ रहा था।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सचिव श्रम की अध्यक्षता में त्रिदलीय समिति का गठन किया। समिति की बैठक 27 अप्रैल को हुई और उसकी रिपोर्ट के आधार पर मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।
इसके बाद बुधवार को नई वेतन दरें जारी कर दी गईं। इस फैसले से प्रदेश के लाखों श्रमिकों को सीधा लाभ मिलेगा और औद्योगिक क्षेत्रों में संभावित अशांति को भी टाला जा सकेगा।
