हल्द्वानी में गैस किल्लत पर बवाल, पार्षदों का एजेंसी घेराव, ग्रामीणों ने रोका वाहन

हल्द्वानी में गैस सिलिंडर की किल्लत को लेकर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। सरस मार्केट स्थित इंडेन गैस एजेंसी पर पार्षदों ने घेराव कर विरोध जताया। प्रबंधक के मौके पर न मिलने से आक्रोशित पार्षदों ने कर्मचारियों को जमकर खरी-खोटी सुनाई।

पार्षदों का आरोप है कि एक महीने पहले बुकिंग कराने के बावजूद लोगों को गैस सिलिंडर नहीं मिल रहा है। वार्डों में गैस वितरण के लिए पहुंच रहे कर्मचारी सिलिंडर खत्म होने की बात कहकर वापस लौट रहे हैं। वहीं कई उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें डिलीवरी का मैसेज मिलने के बावजूद गैस नहीं मिली।

पार्षद नीमा भट्ट और शैलेंद्र दानू सहित अन्य प्रतिनिधि एजेंसी के बाद कुमाऊं कमिश्नर से मिलने उनके आवास पहुंचे, लेकिन बैठक में व्यस्त होने के कारण उनसे मुलाकात नहीं हो सकी।

गलत सूचना से बढ़ा विवाद
एजेंसी प्रबंधन द्वारा हीरानगर में गैस डिलीवरी की सूचना दिए जाने पर पार्षदों ने लोगों को जानकारी दी, लेकिन गैस न पहुंचने से लोगों में नाराजगी और बढ़ गई।

पांच किलो सिलिंडर पर स्पष्ट आदेश नहीं
पेट्रोलियम मंत्रालय के पांच किलो सिलिंडर वितरण संबंधी निर्णय पर अभी तक स्थानीय प्रशासन को कोई स्पष्ट आदेश नहीं मिला है। जिले में करीब 1500 छोटे सिलिंडर का स्टॉक मौजूद है, हालांकि सरस मार्केट एजेंसी के पास फिलहाल इनकी उपलब्धता नहीं है।

जिला पूर्ति अधिकारी मनोज बर्मन के अनुसार, गैस सिलिंडर बुकिंग के आधार पर वितरित किए जा रहे हैं और पांच किलो सिलिंडर केवल कनेक्शन धारकों को ही दिए जा रहे हैं।

मेयर की चेतावनी के बावजूद नहीं सुधरी व्यवस्था
31 मार्च को नगर निगम की बैठक में मेयर गजराज बिष्ट ने गैस किल्लत पर नाराजगी जताते हुए एजेंसी पर तालाबंदी की चेतावनी दी थी। बावजूद इसके, छह दिन बाद भी हालात में खास सुधार नहीं हुआ है।

ग्रामीणों ने रोका गैस वाहन
लामाचौड़ के रामणी गांव में भी गैस न मिलने से ग्रामीणों ने हंगामा कर दिया। डीएसी नंबर होने के बावजूद सिलिंडर न देने पर ग्रामीणों ने गैस से भरे वाहन को रोक लिया।

सूचना पर जिला पंचायत सदस्य डॉ. छवि कांडपाल मौके पर पहुंचीं और अधिकारियों से वार्ता की। अधिकारियों ने तीन दिन में नए डीएसी नंबर जारी करने का आश्वासन दिया, जिसके बाद ग्रामीण शांत हुए।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उनकी बुकिंग के बावजूद सिलिंडर किसी और को दे दिए गए, जिससे एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।