पौड़ी में गहराया जल संकट, जरूरत से 50 लाख लीटर कम हो रही पेयजल आपूर्ति

Dehradun : उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में जल संकट लगातार गहराता जा रहा है। हर घर जल पहुंचाने के सरकारी दावों और योजनाओं के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिदिन 40 एमएलडी पानी की आवश्यकता के मुकाबले केवल 35 एमएलडी पेयजल आपूर्ति हो पा रही है। यानी रोजाना करीब 50 लाख लीटर पानी की कमी बनी हुई है।

पौड़ी और लैंसडौन जैसे शहरी क्षेत्रों में भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं। सरकारी दफ्तरों तक पहुंचने वाली हर तीसरी शिकायत पेयजल संकट से जुड़ी बताई जा रही है। वहीं कम बारिश और सूखते जलस्रोतों ने समस्या को और गंभीर बना दिया है।

जानकारी के अनुसार पिछले वर्ष पूरे उत्तराखंड में सबसे कम बारिश पौड़ी जिले में दर्ज की गई थी। हालात इतने खराब हैं कि जिले में जल संकट को लेकर लोकगीत तक बन चुके हैं।

देवप्रयाग से पौड़ी की ओर बढ़ते ही कई सूखे हैंडपंप पानी की किल्लत की गवाही देते नजर आते हैं। अलकनंदा नदी पर बने पुल से लेकर पयाल गांव, पौड़ी और खिर्सू मार्ग तक कई हैंडपंप पूरी तरह सूख चुके हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात के दिनों को छोड़ दें तो सालभर पेयजल संकट बना रहता है। पौड़ी शहर में करीब 50 लाख लीटर पानी की जरूरत है, जबकि प्रतिदिन केवल 30 लाख लीटर पानी की ही आपूर्ति हो पा रही है।

पौड़ी शहर की पेयजल व्यवस्था मुख्य रूप से दो बड़ी परियोजनाओं पर निर्भर है। पहली श्रीनगर से आने वाली लगभग 30 किलोमीटर लंबी पेयजल लाइन और दूसरी नानघाट परियोजना, जिसके तहत करीब 80 किलोमीटर दूर से पानी लाया जाता है। हालांकि नानघाट परियोजना के स्रोतों में भी जलस्तर लगातार घट रहा है।

इसके अलावा पेयजल लाइनों के बार-बार टूटने और बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण भी लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है। पौड़ी के सफरदखाल, कोट, डांडा नागराज और चमोली क्षेत्र में भी जल संकट गंभीर बना हुआ है।

स्थानीय लोगों ने सरकार से स्थायी समाधान की मांग करते हुए जल संरक्षण और नई पेयजल योजनाओं पर तेजी से काम करने की अपील की है।