गंगा प्रेम हॉस्पिस में नर्सें बनीं कैंसर मरीजों का परिवार, सेवा और संवेदनशीलता की अनूठी मिसाल

Rishikesh: गंगा प्रेम हॉस्पिस में जिंदगी की अंतिम दहलीज पर खड़े कैंसर मरीजों के लिए नर्सिंग स्टाफ केवल इलाज करने वाला कर्मचारी नहीं, बल्कि उनका अपना परिवार बन चुका है। यहां कोई मरीज उन्हें बेटे की तरह दुलारता है, कोई बेटी मानकर स्नेह देता है, तो किसी के लिए यही लोग मां-बाप जैसा सहारा हैं।

हॉस्पिस में इस समय करीब 19 कैंसर मरीज भर्ती हैं। इनमें 14 वर्ष का किशोर भी शामिल है और 95 वर्ष के बुजुर्ग भी। कई मरीज ऐसे हैं जिन्हें बीमारी के कठिन दौर में अपनों ने अकेला छोड़ दिया, लेकिन यहां की नर्सें उनके लिए रिश्तों की कमी महसूस नहीं होने देतीं।

दिन-रात दर्द से जूझ रहे मरीजों की देखभाल करना आसान नहीं होता। कोई पूरी रात दर्द में जागता है, किसी के घाव लगातार रिसते रहते हैं, तो कोई मानसिक पीड़ा में टूट जाता है। ऐसे हर कठिन पल में नर्सिंग स्टाफ मरीजों के साथ मजबूती से खड़ा रहता है।

समय पर दवा देना, भोजन कराना, घावों की सफाई करना, कपड़े बदलना और मरीजों की व्यक्तिगत देखभाल तक की हर जिम्मेदारी नर्सें पूरे समर्पण और संवेदनशीलता के साथ निभाती हैं। कई ऐसे काम, जिन्हें कई बार अपने भी करने से कतराते हैं, उन्हें यहां का स्टाफ बिना किसी शिकायत के करता है।

नर्सें सिर्फ मरीजों के शरीर का ही नहीं, बल्कि उनके टूटे मन का भी सहारा बनती हैं। दर्द और तनाव में कई बार मरीज गुस्सा भी कर बैठते हैं, लेकिन स्टाफ मुस्कान और धैर्य के साथ उनकी हर बात सुनता है।

गंगा प्रेम हॉस्पिस में सेवा केवल नौकरी नहीं, बल्कि मानवता की सच्ची मिसाल बन चुकी है। यहां मरीजों को कभी अकेलापन महसूस नहीं होने दिया जाता। कोई उनका हाथ थामे रहता है, कोई सिर सहलाता है, तो कोई पूरी रात उनके पास बैठकर उनका हौसला बढ़ाता है।

परिचालन अधिकारी पूजा डोगरा ने बताया कि वर्ष 2005 में गंगा प्रेम हॉस्पिस संस्था की स्थापना हुई थी। वर्ष 2007 में निशुल्क कैंसर शिविरों की शुरुआत की गई और उसी वर्ष अंतिम चरण के कैंसर मरीजों के लिए होम केयर सेवा शुरू हुई। वर्ष 2017 में 15 बेड के साथ हॉस्पिस की शुरुआत की गई थी, जिसे अब बढ़ाकर 25 बेड कर दिया गया है। यहां सभी सुविधाएं पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं।

उन्होंने बताया कि हॉस्पिस में वर्तमान में 19 नर्सिंग स्टाफ कार्यरत हैं, जो 24 घंटे मरीजों की सेवा में लगे रहते हैं। इसके अलावा देहरादून, ऋषिकेश और हरिद्वार में करीब 400 अंतिम चरण के कैंसर मरीजों की घर जाकर भी देखभाल की जा रही है।

होली, दीपावली और अन्य त्योहारों पर भी यहां का स्टाफ अपने परिवार से पहले मरीजों के साथ खुशियां बांटता है, ताकि उन्हें कभी यह महसूस न हो कि वे अकेले हैं।