पौड़ी में बढ़ रही वनाग्नि की घटनाएं, संसाधनों की कमी से चुनौती गहराई

पौड़ी। प्रदेश में जंगलों की आग लगातार गंभीर चुनौती बनी हुई है। वनाग्नि नियंत्रण को लेकर सरकार और वन विभाग की ओर से संसाधन बढ़ाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद आग की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। पौड़ी जिला भी इससे अछूता नहीं है। बीते दो वर्षों से राज्य में सबसे अधिक वनाग्नि घटनाओं वाले जिलों में पौड़ी दूसरे स्थान पर बना हुआ है।

जिले में गढ़वाल वन प्रभाग और सिविल सोयम पौड़ी वन प्रभाग के अंतर्गत बड़ी संख्या में जंगल आते हैं। कर्मचारियों और संसाधनों की कमी के कारण वन विभाग को आग बुझाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई रेंजों में रेंजर और वन आरक्षी के पद खाली पड़े हैं, जबकि तीन रेंज ऐसी हैं जहां विभाग के पास वाहन तक उपलब्ध नहीं हैं।

वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 से 2025 के बीच पौड़ी जिले में कुल 325 वनाग्नि की घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें लगभग 425 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ। वर्ष 2023 में जिले में 111 घटनाएं हुईं, जिनमें 176.74 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ। वर्ष 2024 में घटनाओं की संख्या बढ़कर 167 पहुंच गई और 209.13 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ। वहीं वर्ष 2025 में अब तक 47 घटनाओं में 50.46 हेक्टेयर वन क्षेत्र को नुकसान पहुंच चुका है।

वन विभाग के अनुसार सिविल सोयम पौड़ी, गढ़वाल वन प्रभाग और नागदेव रेंज वनाग्नि के लिहाज से सबसे अधिक संवेदनशील क्षेत्र हैं। इस वर्ष 15 फरवरी से शुरू हुए फायर सीजन के बाद सिविल सोयम प्रभाग में 19 घटनाओं में करीब 11 हेक्टेयर तथा गढ़वाल वन प्रभाग में आठ घटनाओं में 21 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हो चुका है।

वन विभाग हर वर्ष फायर सीजन से पहले फायर लाइन सफाई, कंट्रोल बर्निंग और जिला फॉरेस्ट फायर प्लान तैयार करने का दावा करता है। हाल के वर्षों में मॉडल क्रू स्टेशन, लीफ ब्लोअर और अन्य उपकरण भी उपलब्ध कराए गए हैं, लेकिन कर्मचारियों और वाहनों की कमी अब भी बड़ी समस्या बनी हुई है। कई स्थानों पर फायर सीजन के दौरान किराए के वाहनों के सहारे काम चलाया जा रहा है।