

नई दिल्ली। लाल किले के पास हुए धमाके ने पूरे देश को हिला दिया है। यह सिर्फ एक ब्लास्ट नहीं, बल्कि एक खतरनाक ‘White Collar Terror’ मॉड्यूल के खुलासे की शुरुआत साबित हो रहा है, जिसमें छह उच्च शिक्षित डॉक्टर आतंक की साज़िश रचते पाए गए हैं।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) अब इस केस की जांच कर रही है, क्योंकि पुलिस को दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और कश्मीर तक फैले एक बड़े नेटवर्क के सबूत मिले हैं।
🔹 कैसे बेनकाब हुआ डॉक्टरों का टेरर मॉड्यूल?
सोमवार को लाल किले के पास धमाके से कुछ घंटे पहले ही पुलिस ने तीन डॉक्टरों समेत आठ लोगों को गिरफ्तार किया था। इन गिरफ्तारियों के बाद फरीदाबाद में दो जगहों से 2,890 किलो विस्फोटक और भारी मात्रा में हथियार बरामद हुए।
जांच से पता चला कि यह मॉड्यूल जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और अंसार गजवत-उल-हिंद (AGH) जैसे आतंकी संगठनों से जुड़ा हुआ था और पाकिस्तान से क्रिप्टोकरेंसी और टेलीग्राम चैनलों के जरिए फंडिंग होती थी।
🔹 मुख्य आरोपी – डॉक्टर मोहम्मद उमर
पुलवामा निवासी डॉ. मोहम्मद उमर, अल-फलाह मेडिकल कॉलेज (फरीदाबाद) में डॉक्टर था। पुलिस का मानना है कि वही इस पूरे नेटवर्क का किंगपिन था और लाल किले के पास जिस i20 कार में धमाका हुआ, उसमें वही सवार था।
अब उसकी पहचान की पुष्टि के लिए DNA टेस्ट कराया जा रहा है।
🔹 अन्य आरोपी डॉक्टर
- डॉ. आदिल राठर – कुलगाम का रहने वाला, GMC श्रीनगर से MBBS किया, अनंतनाग में सीनियर रेजिडेंट था। उसके लॉकर से AK-47 बरामद हुई।
- डॉ. मुजम्मिल – अल-फलाह यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर, जिसके फरीदाबाद ठिकानों से 2,890 किलो विस्फोटक मिला।
- डॉ. शाहीन – लखनऊ की निवासी, जिसे फरीदाबाद से गिरफ्तार कर श्रीनगर लाया गया।
- डॉ. सज्जाद अहमद माला – पुलवामा का डॉक्टर, उमर का करीबी दोस्त।
- डॉ. परवेज़ अंसारी – यूपी एटीएस की गिरफ्त में, डॉ. शाहीन का भाई।
🔹 आतंक की नई तस्वीर – ‘White Collar Terror’
जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह मॉड्यूल आतंकवाद की नई शैली को दर्शाता है, जिसमें शिक्षित और प्रोफेशनल लोग आतंक की राह पकड़ रहे हैं।
‘व्हाइट कॉलर टेरर’ नेटवर्क देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है।

