सर्की रजवाहा की पटरी टूटी, सैकड़ों बीघा फसल जलमग्न किसानों को भारी नुकसान

Roorkee :क्षेत्र के लिब्बरहेड़ी और हरचंदपुर गांव के बीच बुधवार सुबह सिंचाई विभाग के सर्की रजवाहे की पटरी अचानक टूट गई, जिससे नहर का पानी तेज बहाव के साथ किसानों के खेतों में घुस गया। देखते ही देखते सैकड़ों बीघा कृषि भूमि झील में तब्दील हो गई, जिससे गेहूं, सरसों और गन्ने की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है।

सुबह जब किसान अपने खेतों पर पहुंचे तो उन्होंने रजवाहे की पटरी को कटा हुआ पाया। पानी का बहाव इतना तेज था कि कुछ ही घंटों में दोनों गांवों के बीच का बड़ा इलाका जलमग्न हो गया। इस समय कटाई के करीब पहुंच चुकी गेहूं की फसल पूरी तरह पानी में डूब गई है। किसानों के अनुसार जलभराव के कारण गेहूं के दाने काले पड़ सकते हैं और फसल सड़ने की आशंका है।

किसानों ने सिंचाई विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि रजवाहे की पटरियों की समय पर सफाई और मजबूती नहीं की गई। चूहों द्वारा बनाए गए बिलों और दरारों के कारण पटरी कमजोर हो रही थी, जिसकी शिकायत पहले भी की गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

अचानक हुए इस नुकसान से किसानों की सालभर की मेहनत और पूंजी पर पानी फिर गया है। विभाग की ओर से तत्काल मदद न मिलने पर ग्रामीणों ने खुद ही फावड़े और मिट्टी के कट्टों से पटरी को बांधने का प्रयास किया, लेकिन पानी का स्तर अधिक होने के कारण उन्हें सफलता नहीं मिल सकी। समाचार लिखे जाने तक पानी का रिसाव जारी था और कोई प्रशासनिक अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा था।

करीब 400 से 500 बीघा क्षेत्र में फसल बर्बाद होने की सूचना है। किसानों ने शासन-प्रशासन से नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है। किसानों का यह भी कहना है कि पिछले नवंबर में भी सर्की रजवाहा टूट चुका है, बावजूद इसके रखरखाव में सुधार नहीं किया गया।

किसान का बयान:
“सर्की रजवाहा टूटने से 400 से 500 बीघा जंगल व खेत बह गया है। गेहूं और सरसों की फसल नष्ट हो गई है। जो गन्ना बोया गया था वह भी खराब हो गया है। शासन-प्रशासन से मांग है कि नुकसान का आकलन कर मुआवजा दिया जाए। सिंचाई विभाग को समय-समय पर मरम्मत और रखरखाव पर ध्यान देना चाहिए।”
— राकेश लोहान, जिला प्रवक्ता, भारतीय किसान यूनियन (टिकैत)