

रुड़की। अशोक नगर स्थित कुमाऊं भवन के प्रांगण में कुमाऊं संस्कृति विकास मंडल समिति की ओर से आयोजित कुमाऊं के पारंपरिक सातूं-आठों पर्व का गौरा और महेश्वर की विदाई के साथ धूमधाम से समापन हुआ। इस अवसर पर कुमाऊं की लोक संस्कृति, परंपरा और रीति-रिवाजों की मनोहारी झलक देखने को मिली।
समापन समारोह में महिलाओं और पुरुषों ने सामूहिक रूप से झोड़ा-चांचरी नृत्य प्रस्तुत कर पर्व की खुशियां मनाईं। पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं ने लोकगीतों की प्रस्तुति दी। झोड़ा-चांचरी की धुन पर पूरा प्रांगण कुमाऊं की सांस्कृतिक छटा से सराबोर नजर आया।
समारोह के अंतिम चरण में गौरा मैया और महेश्वर को विधि-विधान एवं श्रद्धा के साथ विदाई दी गई। विदाई के दौरान माहौल भावुक हो गया। श्रद्धालुओं ने अगले वर्ष फिर इसी उत्साह और उल्लास के साथ सातूं-आठों पर्व मनाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम समिति के अध्यक्ष विजय सिंह वाणी, मार्गदर्शक पूरन सिंह ज्याला एवं मथुरा दत्त कांडपाल के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ। महिला उपाध्यक्ष भागीरथी एरी तथा कार्यक्रम संयोजक कमला थापा के मार्गदर्शन में महिलाओं ने पर्व के विभिन्न आयोजनों में उत्साहपूर्वक भागीदारी की।
समारोह में अशोक नगर, शिवाजी कॉलोनी, विजय नगर, सरिता विहार, आदर्श शिवाजी नगर, न्यू भारत कॉलोनी और गंगा एन्क्लेव सहित विभिन्न क्षेत्रों से समिति से जुड़े बड़ी संख्या में सदस्य शामिल हुए।
वक्ताओं ने कहा कि सातूं-आठों पर्व कुमाऊं की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत और लोक परंपराओं से जोड़ने का अवसर मिलता है।
समापन अवसर पर समिति की ओर से श्रद्धालुओं को प्रसाद और फल वितरित किए गए। इसके बाद गौरा मैया और महेश्वर को श्रद्धा एवं भावुकता के साथ विदाई दी गई।
