

परिवार रजिस्टर और स्कूल के दस्तावेजों में दर्ज था सदाराम नाम, दो पहचान पत्र मिलने से उठे सवाल
हरिद्वार। भूपतवाला में चाय के खोखे में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिले निठारी कांड से सुप्रीम कोर्ट द्वारा बरी किए गए सुरेंद्र कोली की पुरानी पहचान सदाराम के नाम से होने की बात सामने आई है। दावा किया जा रहा है कि परिवार रजिस्टर और स्कूल के दस्तावेजों में भी उसका नाम सदाराम दर्ज था। परिवार की मददगार रहे पूर्व जिला पंचायत सदस्य नारायण रावत ने भी इसकी पुष्टि की है।
नारायण रावत के अनुसार, गांव से शहर जाने के बाद युवक ने अपना नाम सुरेंद्र कोली रख लिया था। निठारी कांड में बरी होने के बाद रिहा होकर वह आधार कार्ड में भी अपना पुराना नाम दर्ज कराने का प्रयास कर रहा था, लेकिन दस्तावेजी जटिलताओं के चलते ऐसा नहीं हो सका।
दो पहचान पत्र मिलने से सामने आई पुरानी पहचान
18 सितंबर को सप्तसरोवर मार्ग स्थित वैष्णो देवी मंदिर के सामने एक चाय के खोखे में सुरेंद्र कोली संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिला था। उसके गले में रस्सी का फंदा कसा हुआ था, जबकि रस्सी का आधा टूटा हिस्सा पंखे से लटका मिला था।
पुलिस को उसके बैग से दो पहचान पत्र मिले थे। इनमें एक आधार कार्ड पर ‘सुरेंद्र कोली पुत्र शंकर, निवासी सेक्टर-32, नोएडा, गौतमबुद्धनगर’ दर्ज था। वहीं, वर्ष 2003 के बताए जा रहे पुराने पहचान पत्र पर ‘सदाराम पुत्र शंकर, निवासी ग्राम मंगरूखाल रुडोली, अल्मोड़ा’ लिखा था। दो अलग-अलग पहचान पत्र सामने आने के बाद हरिद्वार में अपनी पुरानी पहचान छिपाकर रहने की बात भी सामने आई।
परिजनों ने जताई हत्या की आशंका
पुलिस ने प्रथमदृष्टया आत्महत्या मानते हुए मामले की जांच शुरू की थी। हालांकि, शनिवार को हरिद्वार पहुंचे परिजनों ने आत्महत्या की बात से इन्कार करते हुए हत्या की आशंका जताई थी।
फिलहाल पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है। वीडियोग्राफी के बीच पैनल से पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया था। परिजनों ने खड़खड़ी श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया और इसके बाद वापस लौट गए।
