एक व्यक्ति अधिक बैठने पर बीमा दावा खारिज नहीं किया जा सकता

देहरादून। वाहन में निर्धारित क्षमता से एक व्यक्ति अधिक बैठा होने मात्र से बीमा दावा खारिज नहीं किया जा सकता, खासकर तब जब ओवरलोडिंग दुर्घटना का कारण न रही हो। राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने गो डिजिट जनरल इंश्योरेंस कंपनी की ओर से बीमा दावा खारिज करने के लिए दिए गए ओवरलोडिंग के तर्क को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की है। आयोग की अध्यक्ष कुमकुम रानी और सदस्य बीएस मनराल की पीठ ने कंपनी को 6,49,500 रुपये सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज और 10 हजार रुपये मुकदमा खर्च के साथ अदा करने के आदेश दिए हैं।

मामला चकराता निवासी जयपाल सिंह चौहान की महिंद्रा कार से जुड़ा है। दो मार्च 2020 को कालसी क्षेत्र के कचटा, गैंगरो गांव के पास वाहन दुर्घटनाग्रस्त होकर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। वाहन का बीमा 7.50 लाख रुपये से अधिक की बीमित घोषित कीमत पर था। कंपनी ने दावा खारिज करते हुए दुर्घटना की सूचना तीन दिन बाद दिए जाने, चालक के संबंध में तथ्य छिपाने और निर्धारित क्षमता से अधिक लोगों के सवार होने का तर्क दिया था।

तीन दिन की देरी को नहीं माना आधार

आयोग ने सूचना देने में देरी के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के ओम प्रकाश बनाम रिलायंस जनरल इंश्योरेंस और गुरशिंदर सिंह बनाम श्रीराम जनरल इंश्योरेंस मामलों के फैसलों का हवाला दिया। पीठ ने कहा कि केवल तकनीकी आधार पर वास्तविक बीमा दावे को खारिज नहीं किया जा सकता। कंपनी के नियुक्त सर्वेयर आधार शर्मा ने दुर्घटना को संभव और वाहन को हुआ नुकसान वास्तविक माना था। ऐसे में केवल तीन दिन की देरी को दावा खारिज करने का आधार नहीं बनाया जा सकता।

चालक को लेकर आपत्ति भी खारिज

चालक को लेकर कंपनी की आपत्ति पर भी आयोग ने राहत नहीं दी। सर्वे रिपोर्ट में पुलिस डायरी के आधार पर संदीप चौहान का नाम चालक के रूप में दर्ज था। दुर्घटना से जुड़े दो मोटर दुर्घटना दावा मामलों में कंपनी के समझौता करने का भी आयोग ने उल्लेख किया। इसके चलते चालक के लाइसेंस से संबंधित आपत्ति को अप्रासंगिक माना गया। आयोग ने जिला आयोग के 23 जनवरी 2026 के दावा खारिज करने वाले आदेश को भी निरस्त कर दिया।

ओवरलोडिंग को दुर्घटना से जोड़ना जरूरी

आयोग ने कहा कि वाहन की क्षमता पांच लोगों की थी और कंपनी के अन