

प्रयागराज । नोएडा में अप्रैल 2026 में हुए मजदूर आंदोलन से जुड़े मामले में दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा एवं एक्टिविस्ट आकृति चौधरी को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लेने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने आकृति चौधरी की हिरासत को रद्द करते हुए इसे मनमाना और कानून के अनुरूप नहीं माना। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की पीठ ने 2 सितंबर को दिए अपने फैसले में कहा कि आकृति के खिलाफ NSA लगाने के लिए पर्याप्त ठोस सामग्री उपलब्ध नहीं थी। अदालत ने गौतम बुद्ध नगर की तत्कालीन जिलाधिकारी मेधा रूपम द्वारा पारित हिरासत आदेश पर भी कड़ी नाराजगी जताई और अधिकारियों के आचरण को गंभीरता से लिया।हाईकोर्ट ने आकृति चौधरी को हुई मानसिक एवं शारीरिक पीड़ा के लिए 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया। खास बात यह है कि यह राशि संबंधित अधिकारियों के वेतन से वसूलने का आदेश दिया गया है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों की सर्विस रिकॉर्ड में अपनी नाराजगी दर्ज करने का भी निर्देश दिया।अदालत ने अधिकारियों को संविधान के प्रति अपनी जिम्मेदारी याद दिलाते हुए कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों की निष्ठा संविधान के प्रति होनी चाहिए। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि पुलिस और प्रशासन द्वारा अधिकारों के दुरुपयोग पर रोक नहीं लगाई गई तो उत्तर प्रदेश को एक “Orwellian Dystopia” जैसी स्थिति की ओर ले जाने का खतरा है।इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है।
