ईडी कार्रवाई पर हरीश रावत का पलटवार

बोले- मेरे 60 साल के राजनीतिक जीवन पर धब्बा लगाने की कोशिश, आयोग बनाकर करा लें कार्यकाल की जांच

देहरादून। पीएस चंदन जीना के घर पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि उनके 60 साल के राजनीतिक जीवन पर धब्बा लगाने की कोशिश की जा रही है। रावत ने चुनौती देते हुए कहा कि उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल की जांच के लिए आयोग गठित किया जाए और पूरी तरह जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में हुई सरकारी नियुक्तियों में कहीं भी पद का दुरुपयोग नहीं किया गया।

सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए हरीश रावत ने कहा कि उनके तीन वर्ष के कार्यकाल में 42 हजार से अधिक अभ्यर्थियों को नौकरी मिली, जबकि 18 हजार पदों पर भर्ती का प्रस्ताव जारी किया गया था। उनकी सरकार ने अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के साथ शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और मेडिकल भर्ती बोर्ड का गठन किया। उन्होंने दावा किया कि तीन साल के भीतर दो बार लोक सेवा आयोग के माध्यम से भर्तियां कराई गईं।

रावत ने कहा कि काम करते हुए कभी-कभी चूक हो सकती है और उनसे भी एक चूक हुई। उन्होंने कहा कि अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष पद पर की गई नियुक्ति में संबंधित व्यक्ति उस पद की गरिमा का सम्मान नहीं रख सके। मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई और परीक्षा निरस्त करने के लिए तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई गई। उन्होंने अध्यक्ष की नियुक्ति में हुई चूक के लिए क्षमा भी मांगी।

पूर्व मुख्यमंत्री ने ईडी, सीबीआई समेत सभी जांच एजेंसियों को उनके मुख्यमंत्री के रूप में तीन साल के कार्यकाल की जांच करने की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि यदि उनके तथाकथित छिपे खजाने की तलाश में छापा मारना है तो वहां भी छापा मारा जाए। साथ ही स्टिंग मामले और राष्ट्रपति शासन लागू किए जाने की परिस्थितियों की भी गहराई से जांच कराने की मांग की।

रावत ने कहा कि वह दस साल से सत्ता से बाहर हैं, लेकिन कुछ लोगों की नाराजगी अब भी खत्म नहीं हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें देखकर कई लोगों के पेट में मरोड़ उठती है और यही वजह है कि उन्हें लगातार निशाना बनाया जा रहा है।