

देहरादून। अगले विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रदेश की 13 अनुसूचित जाति आरक्षित सीटों के अलावा दो सामान्य सीटों पर भी एससी वर्ग के प्रत्याशियों को मैदान में उतार सकती है। संगठन के भीतर इस रणनीति पर मंथन चल रहा है। यदि यह फार्मूला लागू हुआ तो भाजपा कुल 15 सीटों पर अनुसूचित जाति के प्रत्याशियों को टिकट दे सकती है।
प्रदेश में चल रहे शुद्धिकरण विवाद को भाजपा संगठन गंभीरता से ले रहा है। हल्द्वानी शुद्धिकरण मामले पर कोर कमेटी की बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की चर्चा के बाद पार्टी की रणनीति में एससी समाज को लेकर सक्रियता बढ़ी है। पार्टी का लक्ष्य आरक्षित सीटों पर अपने प्रदर्शन को मजबूत करने के साथ अनुसूचित जाति समाज में राजनीतिक पकड़ बढ़ाना है।
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश की 13 एससी आरक्षित सीटों में भाजपा ने नौ सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि चार सीटें कांग्रेस के खाते में गई थीं। हरिद्वार जिले की तीनों आरक्षित सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशी विजयी हुए थे। वहीं, ऊधमसिंह नगर की बाजपुर सीट भी कांग्रेस ने जीती थी।
वर्ष 2017 में भाजपा ने 13 आरक्षित सीटों में से 11 पर जीत हासिल की थी। ऐसे में आगामी चुनाव में पार्टी आरक्षित सीटों पर अपना पिछला प्रदर्शन सुधारने की रणनीति पर काम कर रही है। 2011 की जनगणना के अनुसार उत्तराखंड की कुल 1,00,86,292 आबादी में अनुसूचित जाति की आबादी 18,92,516 थी, जो कुल आबादी का 18.76 प्रतिशत है।
