


उत्तराखंड में वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वन विभाग में 1,000 फॉरेस्ट गार्ड की नई भर्ती के निर्देश दिए हैं。 इसके साथ ही, जंगलों में आग बुझाने के लिए फायर लाइन के पास छोटी तलैया (तालाब) बनाने और गांव आधारित ‘शीतलाखेत मॉडल’ लागू करने को कहा गया है
वनाग्नि रोकथाम के लिए मास्टरप्लान की मुख्य बातें:

- त्वरित कार्रवाई: वनाग्नि (जंगल की आग) की सूचना मिलने के 1 घंटे के भीतर संबंधित अधिकारियों और दस्तों का मौके पर पहुंचना अनिवार्य कर दिया गया है。
- फॉरेस्ट गार्ड भर्ती: वनों की प्रभावी निगरानी और आग नियंत्रण के लिए वन विभाग में 1,000 वन रक्षकों (फॉरेस्ट गार्ड) की सीधी भर्ती की जाएगी。
- ‘शीतलाखेत मॉडल’ का विस्तार: स्थानीय ग्रामीणों, महिलाओं, युवक मंगल दलों और वन पंचायतों को शामिल करके गांव-गांव ‘फायर वॉच टीम’ बनाई जाएगी。
- तालाबों का निर्माण: आग पर तुरंत काबू पाने के लिए फायर लाइन के आसपास जल स्रोतों के रूप में छोटी-छोटी तलैया बनाई जाएंगी。
- बजट और उपकरण:
