
मथुरा में यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए हादसे में एक मां ने अपने दोनों बच्चों को तो बचा लिया, लेकिन खुद की जान नहीं बचा सकी। परिवार के लोग हादसे की जानकारी के बाद पहुंचे। उसकी लाश भी अब घरवालों को नहीं मिल रही है।


यमुना एक्सप्रेसवे पर मथुरा में घने कोहरे के कारण दर्दनाक हादसा हो गया। एक के बाद एक सात बसें और तीन कारें आपस में टकरा गईं। टक्कर लगने के बाद इन वाहनों में भयंकर आग लग गई। इस हादसे में अब तक 10 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, वहीं 80 लोगों के घायल होने की सूचना है।
मथुरा में यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए हादसे में एक मां ने अपने दोनों बच्चों को तो बचा लिया, लेकिन खुद की जान नहीं बचा सकी। परिवार के लोग हादसे की जानकारी के बाद पहुंचे। उसकी लाश भी अब घरवालों को नहीं मिल रही है
हमीरपुर राठ की रहने वाली 42 साल की पार्वती अपने दो बच्चों प्राची और शनि के साथ नोएडा से अपने पति गोविंद के पास लौट रही थी। अचानक बस टकरा गई और उसमें तेजी से आग लग गई। पार्वती ने बिना कुछ सोचे अपने दोनों बच्चों को बस का कांच तोड़कर बाहर निकाल लिया, लेकिन वह खुद नहीं निकल पाई।पार्वती के देवर गुलज़ारी ने बताया कि पार्वती के गले में कांच टूटकर फंस गया और वह उसी बस में रह गई थी। उन्हें जब इस हादसे की जानकारी हुई तो सीधे हमीरपुर से पार्वती को खोजते हुए फिर रहे हैं। गुलज़ारी ने बताया कि उन्हें पार्वती न तो जिला अस्पताल में मिली है और न ही वृंदावन वाले अस्पताल में अब वह उसे खीजते हुए पोस्टमार्टम हाउस आए हैं।पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी उन्हें आश्वासन दे रहे हैं। मगर पार्वती के दोनों बच्चे और परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है। उन्होंने बताया कि यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए हादसे ने सब कुछ बर्बाद कर दिया।
