


देहरादून। प्रदेश में गलत तथ्यों के आधार पर केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सीटीईटी) में शामिल होने की तैयारी कर रहे शिक्षकों को बड़ा झटका लगा है। विभाग ने ऐसे शिक्षकों को जारी की गई अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। यह कार्रवाई पात्रता संबंधी संशय सामने आने के बाद की गई है।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा एक से आठ तक पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य कर दिया है। पदोन्नति और सेवा में बने रहने के लिए शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक टीईटी उत्तीर्ण करना होगा। हालांकि जिन शिक्षकों की सेवा अवधि पांच वर्ष या उससे कम शेष है, उन्हें इस अनिवार्यता से छूट दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद बड़ी संख्या में शिक्षक टीईटी और सीटीईटी के लिए आवेदन कर रहे हैं। विभागीय जानकारी के अनुसार वर्ष 2010 से पहले नियुक्त कुछ बीएड धारक शिक्षक, जो वर्तमान नियमों के तहत सीटीईटी के लिए पात्र नहीं हैं, विभाग से एनओसी प्राप्त करने के बाद सीबीएसई के पोर्टल पर स्वयं को बीटीसी या डीएलएड प्रशिक्षित दर्शाकर आवेदन कर रहे हैं।
मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी हरिद्वार अमित कुमार चंद ने आदेश जारी कर पहले से दी गई एनओसी को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया है। आदेश में कहा गया है कि विभिन्न तिथियों में जारी एनओसी के संबंध में यह तथ्य सामने आया है कि आवेदक शिक्षकों की शैक्षणिक अर्हता और पात्रता की स्थिति उप शिक्षा अधिकारी स्तर से स्पष्ट नहीं की गई थी, जिससे पात्रता को लेकर संशय उत्पन्न हो गया है।
जिला शिक्षा अधिकारी ने उप शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पात्र शिक्षकों के मामलों की संस्तुति सहित पूरी जानकारी कार्यालय को उपलब्ध कराई जाए, ताकि पात्रता की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जा सके।
सूत्रों के अनुसार केवल हरिद्वार ही नहीं, बल्कि प्रदेश के अन्य जिलों में भी ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां शिक्षकों ने कथित रूप से गलत जानकारी देकर सीटीईटी के लिए आवेदन किया है। विभाग अब ऐसे सभी मामलों की जांच कर रहा है।
