


नई दिल्ली। भगवान बुद्ध के प्रमुख शिष्यों अरहंत सारिपुत्र और अरहंत महामोग्गलान के पवित्र अस्थि कलश मंगोलिया में सफल प्रदर्शनी के बाद विशेष विमान से भारत वापस लौट आए हैं। इन पवित्र अवशेषों को एक आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल की देखरेख में नई दिल्ली लाया गया। यह प्रदर्शनी भारत और मंगोलिया के बीच प्राचीन सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
मंगोलिया की राजधानी में स्थित Gandan Tegchenling Monastery में इन पवित्र अवशेषों को 10 दिनों तक श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ रखा गया था। इस दौरान लगभग एक लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन कर श्रद्धांजलि अर्पित की और बौद्ध परंपरा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।

विशेषज्ञों के अनुसार, भगवान बुद्ध और उनके प्रमुख शिष्यों से जुड़े पवित्र अवशेषों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अत्यंत सम्मान दिया जाता है। इनकी यात्रा और प्रदर्शन के दौरान इन्हें ‘राष्ट्राध्यक्ष’ के समान विशेष सुरक्षा और प्रोटोकॉल प्रदान किया जाता है, जिससे उनकी गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
उल्लेखनीय है कि भगवान बुद्ध के प्रसिद्ध पिपरहवा अवशेष, जो वर्ष 1898 में Piprahwa में खोजे गए थे, वे भी विभिन्न अंतरराष्ट्रीय धार्मिक यात्राओं और प्रदर्शनों के बाद पहले ही भारत लौट चुके हैं।
इस प्रकार की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों का आयोजन International Buddhist Confederation और Ministry of Culture के सहयोग से किया जाता है। इसका उद्देश्य विश्वभर में बौद्ध विरासत का प्रचार-प्रसार करना और भारत की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करना है।
