

रुद्राभिषेक, नवग्रह और पितृ पूजन के साथ यज्ञ का आयोजन, श्रद्धालुओं ने दी आहुति
रुड़की। श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर, गंगा घाट रुड़की में चल रही कालसर्प योग पूजा के तीसरे दिन सोमवार को विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का विधि-विधान से आयोजन किया गया। पूजा के दौरान गणपति पूजन, गौरी पूजन, रुद्राभिषेक, पितृ पूजन, कैलाश पूजन, नवग्रह पूजन और सर्वतोभद्र पूजन संपन्न कराया गया।
इसके बाद भगवान शिव का रुद्राभिषेक किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ का आयोजन हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने आहुति दी। यज्ञ की पूर्णाहुति के बाद भगवान शंकर की भव्य आरती की गई। आरती के पश्चात श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
पूजा-अनुष्ठान पंडित राम गोपाल पाराशर, पंडित रामराज त्रिपाठी और पंडित सतीश कौशिक ने संपन्न कराया। पंडित राम गोपाल पाराशर ने बताया कि वैदिक ज्योतिष में जब कुंडली के सभी सात ग्रह राहु और केतु के मध्य आ जाते हैं तो इसे कालसर्प योग कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसके निवारण के लिए भगवान शिव, नाग देवता, नवग्रह और पितरों की पूजा को विशेष फलदायी माना जाता है।
उन्होंने बताया कि कालसर्प योग के 12 प्रकार माने गए हैं। मान्यता के अनुसार इसके प्रभाव से मानसिक बेचैनी, कार्यों में रुकावट, करियर और कारोबार में बाधा तथा विवाह और शिक्षा से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं। नाग पंचमी के अवसर पर भगवान शिव और नाग देवता की आराधना को कालसर्प योग की शांति के लिए विशेष महत्व दिया जाता है।
पूजन कार्यक्रम में रुद्रांश, करण पुरी, चांदनी, राजकुमारी, नीता, अर्चना मौर्य, वरदान, रश्मि, आयुषी, नरेश, लवकुश पाराशर, आशीष, दीक्षा, सूची धारा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
