मौत बिल्कुल उसके पीछे खड़ी है, सामने बचने का रास्ता है, बस सीढ़ी के सहारे एक छोटा सा गैप पार करना है। लेकिन वो वहीं सुन्न खड़ा है। न उसके हाथ काम कर रहे हैं, न पैर हिल रहे हैं। वो पत्थर की तरह जम गया है।
दिल्ली के साकेत स्थित KIA शोरूम में भड़की आग ने सिर्फ गाड़ियां नहीं जलाईं, बल्कि हमारे ‘आरामदेह’ लाइफस्टाइल के मुंह पर एक बहुत जोरदार तमाचा मारा है।
आसमान छूता काला धुआं, दम घोंटती हवा और पीछे से तेजी से बढ़ती हुई मौत… ऐसे खौफनाक मंजर में जिसे जहां से रास्ता मिला, वो वहां से भागा। कोई छज्जे से लटक कर नीचे कूद रहा था, तो कोई हांफते हुए सीढ़ियों से अपनी जान बचा रहा था। लेकिन इसी अफरातफरी के बीच एक ऐसा खौफनाक नज़ारा सामने आया, जिसे देखकर किसी का भी खून खौल जाए और रूह कांप जाए।
नहीं! यह सिर्फ ऊंचाई का खौफ नहीं था। यह उस ‘शरीर’ की गवाही थी जिसने अपनी पूरी जिंदगी में शायद ही कभी पसीना बहाया हो। जब आप सालों तक अपने शरीर को सिर्फ गद्देदार कुर्सियों, एसी कमरों और जंक फूड की आदत डाल देते हैं, तो ऐसे आपातकाल में वो शरीर आपके दिमाग का आदेश मानना बंद कर देता है। आपके पास न स्टैमिना होता है, न फुर्ती और न ही वो ताकत जो एक झटके में आपको खतरे से बाहर खींच ले।
इस पूरी तस्वीर में सबसे ज्यादा दर्दनाक बात उस शख्स की बेबसी नहीं, बल्कि उस फरिश्ते की जद्दोजहद है जो सामने खड़ा था। एक दूसरा इंसान, जो अपनी जान की परवाह किए बिना, उस मौत के कुएं के पास खड़ा होकर उसे खींचने की कोशिश कर रहा था। जरा सोचिए! उस मददगार की जिंदगी भी सिर्फ इसलिए रिस्क में पड़ गई क्योंकि सामने वाला अपनी भारी-भरकम काया और जीरो-फिजिकल एक्टिविटी के कारण अपनी जान बचाने लायक भी फिट नहीं था!
हम लाखों का हेल्थ इंश्योरेंस ले लेते हैं, महंगी गाड़ियां खरीद लेते हैं, लेकिन अपने शरीर को ‘इमरजेंसी प्रूफ’ नहीं बनाते। फिटनेस कोई शौक नहीं है, सिक्स-पैक एब्स दिखाना कोई अनिवार्यता नहीं है—लेकिन फिटनेस ‘सर्वाइवल’ (Survival) की सबसे बेसिक शर्त है!
अगर आपके शरीर में इतनी फुर्ती नहीं है कि आप मुसीबत के वक्त चार कदम दौड़ सकें या लटक कर अपनी जान बचा सकें, तो आप सिर्फ अपने लिए ही नहीं, बल्कि उस इंसान के लिए भी ‘बोझ’ और ‘खतरा’ बन जाते हैं जो आपको बचाने आता है।
जाग जाइए, इससे पहले कि कोई और हादसा जगाए!
दिन के 24 घंटों में से 45 मिनट अपने शरीर को रगड़िए। पसीना बहाइए। साइकिल चलाइए, दौड़िए या सीढ़ियां चढ़िए। अपने शरीर को इतना मजबूत रखिए कि जब जिंदगी इम्तिहान ले, तो आपके पैर कांपे नहीं, बल्कि आपको और आपके अपनों को सुरक्षित बाहर निकाल लें।
