देहरादून। प्रदेश में भूमि नामांतरण यानी दाखिल-खारिज से जुड़े मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए राजस्व विभाग अब ‘नामांतरण दिवस’ शुरू करने की तैयारी में है। इस दिन राजस्व कार्यालयों में केवल नामांतरण से संबंधित मामलों की सुनवाई की जाएगी। व्यवस्था लागू होने के बाद भूमि खरीद, विरासत, दाननामा समेत अन्य माध्यमों से होने वाले भूमि हस्तांतरण के मामलों की प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने में मदद मिलेगी। इसके लिए सचिव राजस्व परिषद ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
दरअसल, किसी व्यक्ति के भूमि खरीदने के बाद रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी होने पर इसकी सूचना निबंधक कार्यालय से राजस्व विभाग को भेजी जाती है। इसके बाद क्रेता के नाम भूमि के हस्तांतरण यानी नामांतरण की प्रक्रिया नायब तहसीलदार और तहसीलदार स्तर पर शुरू होती है। नियमानुसार संबंधित मामले में इश्तहार जारी किया जाता है, जिसके बाद निर्धारित अवधि में आपत्ति दाखिल की जा सकती है। यदि किसी पक्ष की ओर से आपत्ति नहीं आती है तो निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद पटवारी की रिपोर्ट समेत अन्य औपचारिकताएं पूरी कर नामांतरण का आदेश जारी किया जाता है।
विरासत और दाननामा के मामले भी होंगे शामिल
भूमि नामांतरण के मामलों में केवल खरीद-बिक्री ही नहीं, बल्कि विरासतन, दाननामा और अन्य प्रकार के भूमि हस्तांतरण से जुड़े प्रकरण भी शामिल होते हैं। राजस्व कार्यालयों में ऐसे मामलों की संख्या काफी अधिक रहती है। अलग-अलग कार्यों और मामलों की सुनवाई के बीच नामांतरण के प्रकरणों के निस्तारण में कई बार समय लग जाता है। इससे लोगों को राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं और भूमि संबंधी कार्यों में देरी होती है।
नई व्यवस्था के तहत नामांतरण दिवस पर अधिकारी अपना अधिकतर समय दाखिल-खारिज से संबंधित प्रकरणों की सुनवाई और उनके निस्तारण में लगाएंगे। इससे लंबित मामलों को भी तेजी से निपटाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
राजस्व न्यायालय में लगी तारीख पर भी हो सकेगी सुनवाई
प्रस्तावित व्यवस्था की एक खास बात यह होगी कि यदि किसी नामांतरण से जुड़े प्रकरण में राजस्व न्यायालय में तारीख लगी हुई है, तो संबंधित मामले की सुनवाई भी नामांतरण दिवस पर की जा सकेगी। आपत्ति नहीं होने की स्थिति में पटवारी की रिपोर्ट और अन्य आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर उसी दौरान नामांतरण का आदेश जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी।
राजस्व परिषद की ओर से यह पहल प्रदेश में भूमि के नामांतरण और अधीनस्थ राजस्व न्यायालयों के कामकाज की समीक्षा के दौरान सामने आई है। समीक्षा में नामांतरण से जुड़े मामलों के समयबद्ध निस्तारण पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि प्रस्तावित नामांतरण दिवस के संचालन को लेकर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं।
लोगों को बार-बार नहीं लगाने पड़ेंगे कार्यालयों के चक्कर
राजस्व विभाग की इस व्यवस्था का उद्देश्य नामांतरण की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और समयबद्ध बनाना है। वर्तमान में किसी भूमि के नामांतरण के लिए आवेदन से लेकर इश्तहार, आपत्ति, पटवारी रिपोर्ट और अन्य औपचारिकताओं में समय लगता है। यदि किसी स्तर पर प्रक्रिया लंबित होती है तो आवेदक को स्थिति जानने के लिए संबंधित कार्यालय में बार-बार जाना पड़ता है।
नामांतरण दिवस के माध्यम से संबंधित मामलों को एक निर्धारित दिन पर प्राथमिकता के साथ सुनने और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कार्रवाई करने की व्यवस्था बनाई जाएगी। इससे न केवल लंबित प्रकरणों के निस्तारण में तेजी आने की संभावना है, बल्कि भूमि संबंधी अभिलेखों को भी समय पर अद्यतन करने में मदद मिलेगी।
राजस्व परिषद की योजना के अनुसार, व्यवस्था लागू होने के बाद नामांतरण से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए एक निर्धारित दिन तय किया जाएगा। हालांकि, नामांतरण दिवस की तिथि और इसके संचालन की विस्तृत प्रक्रिया को लेकर विभागीय स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं।
