तीन दिन की मूसलाधार बारिश से लक्सर में किसानों की फसलें बर्बाद, मुआवजे की मांग

लक्सर। लगातार तीन दिनों तक हुई मूसलाधार बारिश ने लक्सर क्षेत्र के किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खेतों में पानी भर जाने से कटाई के लिए तैयार खड़ी धान की फसल पूरी तरह पानी में डूब गई है। कई स्थानों पर कटी हुई धान की फसल भी पानी में बहने और सड़ने लगी है। खेतों में घुटने तक पानी जमा होने से किसानों के सामने फसल बचाने का संकट खड़ा हो गया है। धान के साथ-साथ गन्ने की फसल को भी बारिश से भारी नुकसान पहुंचने की बात सामने आ रही है।

लगातार बारिश के कारण खेत तालाब में तब्दील हो गए हैं। किसान मोटर और अन्य साधनों से खेतों से पानी निकालने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन बारिश का दौर जारी रहने के कारण उनकी कोशिशें नाकाफी साबित हो रही हैं। किसानों का कहना है कि धान की फसल पककर तैयार थी और कुछ ही दिनों में इसकी कटाई शुरू होनी थी, लेकिन बारिश ने उनकी महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया।

प्रभावित किसानों का कहना है कि फसल की आमदनी से बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च, दवाइयों और बेटियों की शादी सहित अन्य जरूरी जरूरतें पूरी होनी थीं। कई किसानों ने खाद, बीज और कीटनाशक के लिए बैंक तथा साहूकारों से कर्ज लिया था। ऐसे में फसल बर्बाद होने से उनके सामने आर्थिक संकट और गहरा गया है।

किसान सलेख चंद ने बताया कि लगातार बारिश के कारण उनकी धान की पूरी फसल पानी में डूब गई है। खेत में इतना पानी भरा हुआ है कि फसल काटना भी मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि समय रहते पानी नहीं निकला तो बची हुई फसल भी पूरी तरह खराब हो जाएगी।

किसानों ने सरकार और जिला प्रशासन से जल्द से जल्द प्रभावित क्षेत्रों में फसलों का सर्वे कराने तथा नुकसान के आधार पर उचित मुआवजा देने की मांग की है। किसानों का कहना है कि सर्वे में देरी होने से नुकसान का सही आकलन करना मुश्किल हो सकता है।

इसके अलावा किसानों ने स्मार्ट मीटर बंद करने, बिजली के बिल माफ करने और किसान ऋण माफ करने की मांग भी उठाई है। किसानों का आरोप है कि प्राकृतिक आपदा के बीच बिजली विभाग की ओर से ट्यूबवेल कनेक्शन काटे जा रहे हैं और बिजली चोरी के मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। किसानों ने इस मामले में भी राहत देने की मांग की है।

अब प्रभावित किसानों की नजर सरकार और प्रशासन पर टिकी हुई है। किसानों को उम्मीद है कि जल्द फसल नुकसान का सर्वे शुरू कराकर उन्हें आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि बारिश से हुए नुकसान के बाद वे अपने परिवार और खेती को दोबारा संभाल सकें।