

हरिद्वार। जनपद में गोवंश संरक्षण और संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए डेयरी विकास विभाग ने नई पहल शुरू की है। जिला योजना के तहत शुरू की गई बछिया पालन योजना में पात्र पशुपालकों को बछिया खरीदने और उसके पालन-पोषण के लिए कुल 30 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। योजना का उद्देश्य गोवंश पालन को प्रोत्साहित करने के साथ ही पशुपालकों को दुग्ध उत्पादन के माध्यम से रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।
जिले में गोवंश पालन के प्रति लोगों का रुझान लगातार कम होता जा रहा है, जबकि पशुपालक भैंस पालन को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं। इसके चलते सड़कों और बाजारों में घूमने वाले निराश्रित पशुओं में भी बड़ी संख्या गोवंश की है। गोवंश के प्रति पशुपालकों की रुचि बढ़ाने और उनकी सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए डेयरी विकास विभाग ने जिला योजना के बजट से बछिया पालन योजना शुरू की है।
खास खबर: सहकारी समितियों के सदस्यों को मिलेगा लाभ
योजना का लाभ केवल उन पशुपालकों को दिया जाएगा, जो दुग्ध उत्पादन सहकारी समितियों के सदस्य हैं और नियमित रूप से अपनी संबंधित समिति को दूध बेच रहे हैं। जनपद में करीब 300 दुग्ध उत्पादन सहकारी समितियां संचालित हैं। इन्हीं समितियों के माध्यम से पात्र पशुपालकों के प्रस्ताव विभाग को भेजे जाएंगे।
योजना के तहत छह माह से एक वर्ष आयु तक की बछिया के पालन के लिए प्रत्येक लाभार्थी को 30 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी। यह धनराशि दो किस्तों में प्रदान की जाएगी। पहली किस्त के रूप में 10 हजार रुपये बछिया खरीदने के लिए दिए जाएंगे, जबकि शेष 20 हजार रुपये उसके पालन-पोषण और चारा-दाना खरीदने के लिए मिलेंगे।
पहले चरण में जनपद के 30 पशुपालकों को योजना का लाभ देने का लक्ष्य रखा गया है। योजना के सफल रहने पर आने वाले वित्तीय वर्षों में इसका विस्तार किए जाने की संभावना है।
डेयरी विकास विभाग के सहायक निदेशक पीयूष आर्य ने बताया कि जिला योजना समिति से प्राप्त बजट से बछिया पालन योजना शुरू की गई है। इसका उद्देश्य गोवंश की सुरक्षा और संरक्षण के साथ-साथ पशुपालकों को दुग्ध उत्पादन के जरिए रोजगार उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि पात्र पशुपालकों को जल्द ही योजना का लाभ देना शुरू किया जाएगा।
