

नई दिल्ली। कुछ वर्ष पहले तक युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे एनर्जी ड्रिंक्स को लेकर उठाए गए सवाल अब एक बड़े नियामकीय विवाद में बदल गए हैं। बच्चों और किशोरों में इन पेय पदार्थों की बढ़ती खपत, इनमें मौजूद कैफीन और चीनी तथा स्वास्थ्य संबंधी दावों को लेकर चिंता के बीच खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने छह प्रमुख ब्रांड्स के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है।हाल में सामने आए इस मामले ने उस बहस को फिर जिंदा कर दिया है कि आखिर एनर्जी ड्रिंक के नाम पर युवाओं को बेचे जा रहे हाई-कैफीन पेय पदार्थों की निगरानी कितनी सख्ती से होनी चाहिए।छह कंपनियों को FSSAI का नोटिसजुलाई 2026 में FSSAI ने Red Bull, Sting, Monster Energy, Hell Energy, Campa Energy Drink Gold Boost और PepsiCo के Adrenaline Rush को नोटिस जारी किया। नियामक ने उत्पादों पर ‘Energy Drink’ जैसे विवरण और कुछ ऐसे दावों पर सवाल उठाया, जिनमें शरीर और दिमाग को सक्रिय करने, फोकस बढ़ाने या ऊर्जा बढ़ाने जैसे प्रभावों का दावा किया गया था। FSSAI के अनुसार ऐसे कार्यात्मक या चिकित्सकीय दावों के लिए नियमों के अनुरूप आधार और प्रमाण आवश्यक हैं। अब नाम भी बदलना पड़ेगाइस मामले में सबसे महत्वपूर्ण नया घटनाक्रम यह है कि FSSAI ने हाई-कैफीन पेय पदार्थों से ‘Energy Drink’ या इसी तरह के विवरण हटाने के लिए 90 दिन की समयसीमा दी है। कंपनियों की समयसीमा बढ़ाने की मांग को भी स्वीकार नहीं किया गया है। मौजूदा समयसीमा 29 सितंबर 2026 तक है। जानकारों के अनुसार ऐसे उत्पादों को नियामकीय तौर पर ‘caffeinated beverage’ के रूप में लेबल किया जाना पड़ सकता है। भारत में कैफीनयुक्त पेय पदार्थों के लिए निर्धारित मानक भी मौजूद हैं और लेबल पर प्रतिदिन 500 मिलीलीटर से अधिक सेवन न करने तथा बच्चों सहित कुछ वर्गों के लिए सावधानी संबंधी निर्देश दिए जाते हैं। Sting ने शुरू किया बदलावFSSAI की कार्रवाई का असर बाजार में भी दिखाई देने लगा है। PepsiCo India ने नए Sting कैन और बोतलों से ‘Energy’ शब्द हटाना शुरू कर दिया है।
कंपनी विज्ञापन और पैकेजिंग में भी बदलाव कर रही है ताकि नियामकीय निर्देशों का पालन किया जा सके। राज्यों में भी कार्रवाईमामला केवल लेबल बदलने तक सीमित नहीं है। राजस्थान में हाई-कैफीन पेय पदार्थों के स्टॉक की जब्ती की कार्रवाई हुई है, जबकि लद्दाख प्रशासन ने भी लेबलिंग नियमों के उल्लंघन की जांच और जब्ती अभियान की जानकारी दी है। महाराष्ट्र में भी बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए स्कूलों के 500 मीटर के दायरे में हाई-कैफीन एनर्जी ड्रिंक्स की बिक्री पर रोक की घोषणा की गई है। साथ ही विद्यार्थियों और अभिभावकों को इनके संभावित प्रभावों के बारे में जागरूक करने की बात कही गई है। पुरानी चिंता अब बनी बड़ा सवालएनर्जी ड्रिंक को लेकर पहले से ही यह चिंता जताई जाती रही है कि युवाओं में इनका सेवन तेजी से बढ़ रहा है। कम कीमत और आक्रामक मार्केटिंग के कारण ये उत्पाद किशोरों तक आसानी से पहुंच रहे हैं। Reuters के अनुसार भारत में एनर्जी ड्रिंक की खुदरा बिक्री तेजी से बढ़ी है और 2023 में बाजार लगभग 907 मिलियन लीटर तक पहुंच गया था। विशेषज्ञों की चिंता मुख्य रूप से कैफीन की अधिक मात्रा, नींद में परेशानी, बेचैनी और दिल की धड़कन बढ़ने जैसे संभावित प्रभावों को लेकर है। यही कारण है कि बच्चों और किशोरों को लेकर इन उत्पादों की उपलब्धता और मार्केटिंग पर बहस तेज हो रही है।हालांकि, एनर्जी ड्रिंक को सीधे ‘नशीला पदार्थ’ कहना सही नहीं होगा। अधिक सटीक सवाल यह है कि हाई-कैफीन पेय पदार्थों की युवाओं में बढ़ती खपत और आक्रामक मार्केटिंग पर कितनी प्रभावी निगरानी हो रही है।अब सवाल सिर्फ ‘नाम’ का नहींFSSAI की कार्रवाई के बाद कंपनियों के सामने केवल पैकेजिंग बदलने की चुनौती नहीं है। उन्हें अपने विज्ञापनों और उत्पादों से जुड़े उन दावों की भी समीक्षा करनी होगी, जिनसे उपभोक्ताओं को स्वास्थ्य या प्रदर्शन के बारे में गलत धारणा हो सकती है।यानी जिस बहस की शुरुआत बच्चों और युवाओं में एनर्जी ड्रिंक की बढ़ती लोकप्रियता को लेकर हुई थी, वह अब लेबलिंग, विज्ञापन, स्वास्थ्य दावों और स्कूलों के आसपास बिक्री तक पहुंच चुकी है।Namaskar City के लिए सवाल यही है—क्या पैकेट से सिर्फ ‘Energy’ शब्द हटने से समस्या खत्म होगी, या युवाओं में हाई-कैफीन पेय पदार्थों की बढ़ती खपत पर भी ठोस कदम उठाने की जरूरत है?
