दो करोड़ में बनी ‘हनुमान अंश’ ने कमाए 100 करोड़, नई पीढ़ी में भी दिखा असर

देहरादून। करीब दो करोड़ रुपये की लागत से बनी फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने 100 करोड़ रुपये की कमाई का आंकड़ा पार कर सफलता का नया अध्याय लिखा है। फिल्म की लोकप्रियता केवल कमाई तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय समाज के अलग-अलग आयु वर्ग, धर्म और क्षेत्रों में भी इसका प्रभाव दिखाई दे रहा है। खास तौर पर युवाओं और स्कूली बच्चों के बीच फिल्म के गीतों और किरदारों को लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। बच्चे और युवा फिल्म के गीतों पर रील भी बना रहे हैं।

फिल्म के लेखक-निर्देशक डॉ. विशाल चतुर्वेदी के अनुसार, ‘हनुमान अंश’ नई पीढ़ी को अध्यात्म से जोड़ने के साथ स्वस्थ मनोरंजन देने का प्रयास है। उनका कहना है कि युवाओं का फिल्म के विषय और किरदारों से जुड़ना उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है।

‘सब हनुमान जी पर छोड़ दिया’

डॉ. विशाल चतुर्वेदी ने फिल्म निर्माण के अनुभव को याद करते हुए बताया कि शूटिंग के पहले दिन महाराज जी का किरदार निभाने वाले अभिनेता अचानक बीमार पड़ गए। अगले दिन नए कलाकार सौभिनव के साथ शूटिंग शुरू करने पहुंचे, लेकिन कैमरा रोल नहीं हुआ। शूटिंग के दौरान कई तरह की अड़चनें आती रहीं। इसके बाद उन्होंने पूरी टीम के साथ हनुमान चालीसा का पाठ किया और फिल्म का काम हनुमान जी पर छोड़ दिया। उनके अनुसार, चालीसा खत्म होते-होते टीम में नई ऊर्जा का अनुभव हुआ। शूटिंग के दौरान जब भी कोई बाधा आई, टीम ने हनुमान चालीसा का पाठ किया।

‘मेरे लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं’

बाबा नीब करौरी महाराज का किरदार निभाने वाले सौभिनव ने कहा कि फिल्म में यह भूमिका मिलना उनके लिए किसी चमत्कार या लीला से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि वह शुरुआत में फिल्म से डॉ. विशाल चतुर्वेदी के सहायक के तौर पर जुड़े थे, लेकिन परिस्थितियां ऐसी बनीं कि उन्हें महाराज का किरदार निभाने का अवसर मिला।

सौभिनव के अनुसार, उन्होंने करीब आठ वर्ष पहले नॉनवेज छोड़ दिया था और हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दिया था। उनका मानना है कि शायद यह किरदार निभाने के लिए उन्हें पहले से ही तैयार किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि आज लोग उनके अंदर महाराज का अंश तलाशते हैं तो इसे वह अपना नहीं, बल्कि बाबा का प्यार मानते हैं।

‘पार्वती’ गीत ने बनाई अलग पहचान

फिल्म के ‘पार्वती’ गीत से लोकप्रिय हुईं सत्या तिवारी ने बताया कि फिल्म के सभी गीतों को काफी समय लेकर तैयार किया गया। उन्होंने फिल्म में पांच गीत लिखने और गाने का कार्य किया है। सत्या तिवारी ने फिल्म के लेखक-निर्देशक डॉ. विशाल चतुर्वेदी को बेहतरीन म्यूजिक डायरेक्टर बताते हुए गीतों की सफलता का श्रेय उन्हें दिया।

उन्होंने कहा कि प्रमोशन के दौरान जब लोग सामूहिक रूप से उनके गीत गाते हैं और खासकर स्कूली बच्चों को सुर में गीत गाते हुए