
देहरादून। उत्तराखंड में गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और बच्चों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य पोर्टल (आरसीएच) का उन्नत संस्करण आरसीएच 2.0 शुरू किया है। उत्तराखंड को इस महत्वाकांक्षी योजना के पायलट प्रोजेक्ट में शामिल किया गया है।
आरसीएच 2.0 एक वेब और मोबाइल आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से गर्भावस्था से लेकर प्रसव और उसके बाद शिशु की स्वास्थ्य सेवाओं तक की पूरी प्रक्रिया का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इसमें लाभार्थी पंजीकरण, हाई-रिस्क गर्भावस्था की पहचान, एंटीनेटल केयर, प्रसव, पोस्टनेटल केयर, बाल स्वास्थ्य सेवाएं और परिवार नियोजन सहित विभिन्न मॉड्यूल शामिल किए गए हैं। साथ ही इसे आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन, पोषण ट्रैकर और डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म से भी जोड़ा गया है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी सूचनाओं का बेहतर आदान-प्रदान संभव होगा।
नई प्रणाली के लागू होने से गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान और नियमित निगरानी आसान होगी। यदि किसी महिला की गर्भावस्था हाई-रिस्क श्रेणी में आती है तो उसकी जानकारी तत्काल सिस्टम में दर्ज होगी, जिससे स्वास्थ्यकर्मी समय रहते आवश्यक उपचार और देखभाल सुनिश्चित कर सकेंगे। आशा कार्यकर्ता और स्वास्थ्य कर्मचारी मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से गांव स्तर पर ही लाभार्थियों का डेटा दर्ज कर सकेंगे, जिससे कागजी कार्यवाही कम होगी और रिकॉर्ड अधिक सटीक एवं अद्यतन रहेंगे।
इसके अलावा बच्चों के टीकाकरण, पोषण स्तर और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी भी डिजिटल रूप से उपलब्ध रहेगी। इससे किसी भी लाभार्थी के छूटने की संभावना कम होगी और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी पहले की तुलना में अधिक प्रभावी एवं पारदर्शी हो सकेगी।
