


देहरादून। उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) ने दिसंबर 2025 की तिमाही में उपभोक्ताओं से 1.39 करोड़ रुपये अधिक वसूल लिए थे। अब यह अतिरिक्त राशि जून में जारी होने वाले बिजली बिलों में समायोजित कर उपभोक्ताओं को वापस दी जाएगी।
उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने यूपीसीएल की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। साथ ही आयोग ने बिजली खरीद और खर्चों का स्पष्ट हिसाब न देने पर यूपीसीएल के रवैये पर नाराजगी भी जताई।

यूपीसीएल ने आयोग के समक्ष दायर याचिका में अक्तूबर से दिसंबर 2025 की तिमाही के लिए ईंधन एवं बिजली खरीद लागत समायोजन (एफपीपीसीए) की मंजूरी मांगी थी। कंपनी के अनुसार इस अवधि में अतिरिक्त बिजली खरीद पर 59.17 करोड़ रुपये खर्च हुए, जबकि उपभोक्ताओं से बिजली बिलों के माध्यम से 60.56 करोड़ रुपये वसूल लिए गए। इस प्रकार कंपनी ने 1.39 करोड़ रुपये अधिक वसूल किए।
यूपीसीएल ने आयोग से अनुरोध किया था कि इस अतिरिक्त राशि को अगली तिमाही के खर्चों में समायोजित करने की अनुमति दी जाए।
नियामक आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद, सदस्य विधि अनुराग शर्मा और सदस्य तकनीकी प्रभात किशोर डिमरी की पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद यूपीसीएल की गणना को अंतरिम मंजूरी प्रदान की। आयोग ने कहा कि संबंधित अवधि के ऑडिटेड व्यावसायिक विवरण उपलब्ध नहीं होने के कारण यह समायोजन अंतरिम राहत के तौर पर किया जाएगा।
आयोग के आदेश के अनुसार मई महीने की बिजली खपत के बदले जून में जारी होने वाले बिलों में यह राशि समायोजित की जाएगी, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।
आयोग ने यूपीसीएल को निर्देश दिए हैं कि वह उपभोक्ताओं की श्रेणीवार वसूली का अलग और स्पष्ट रिकॉर्ड बनाए। साथ ही 30 सितंबर 2025 और 31 दिसंबर 2025 तक की सभी लंबित बिजली खरीद देनदारियों का विस्तृत विश्लेषण तैयार कर आगामी एफपीपीसीए याचिका के साथ अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करे।
