मोदी के 12 वर्ष: देश ने क्या पाया और क्या पाना अभी बाकी है?

9 जून 2014 को नरेंद्र मोदी ने भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी। जून 2026 में उनके नेतृत्व के 12 वर्ष पूरे हो चुके हैं। यह अवधि भारतीय राजनीति, अर्थव्यवस्था और प्रशासन में कई बड़े बदलावों की साक्षी रही है। समर्थकों के लिए यह परिवर्तन और विकास का काल है, जबकि आलोचकों के लिए यह कई अनुत्तरित प्रश्नों और चुनौतियों का दौर भी रहा है। ऐसे में यह समीक्षा आवश्यक है कि इन 12 वर्षों में देश ने क्या हासिल किया और किन क्षेत्रों में अभी लंबा सफर तय करना बाकी है।
देश ने क्या पाया?

  1. मजबूत बुनियादी ढांचा
    पिछले 12 वर्षों में एक्सप्रेस-वे, राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे आधुनिकीकरण, मेट्रो नेटवर्क, हवाई अड्डों और बंदरगाहों के विकास पर अभूतपूर्व निवेश हुआ। देश के दूरदराज क्षेत्रों तक सड़क और डिजिटल कनेक्टिविटी पहुंची है।
  2. डिजिटल क्रांति
    यूपीआई, डिजिटल भुगतान, आधार आधारित सेवाएं और डिजिटल इंडिया अभियान ने भारत को दुनिया के अग्रणी डिजिटल देशों में खड़ा किया है। आज छोटे दुकानदार से लेकर बड़े कारोबारी तक डिजिटल भुगतान को अपनाने लगे हैं।
  3. कल्याणकारी योजनाओं का विस्तार
    उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास योजना, जल जीवन मिशन और जनधन खातों जैसी योजनाओं ने करोड़ों लोगों तक सरकारी लाभ सीधे पहुंचाने का प्रयास किया।
  4. वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा
    भारत की विदेश नीति अधिक सक्रिय हुई है। जी-20 की अध्यक्षता, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की मजबूत उपस्थिति और वैश्विक निवेश आकर्षित करने के प्रयासों ने देश की छवि को मजबूती दी है।
  5. राष्ट्रीय सुरक्षा और निर्णायक फैसले
    अनुच्छेद 370 हटाना, तीन तलाक कानून, राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होना और विभिन्न सुरक्षा अभियानों को सरकार की निर्णायक नीतियों के रूप में देखा जाता है।
  6. विनिर्माण और आत्मनिर्भरता पर जोर
    “मेक इन इंडिया” और पीएलआई जैसी योजनाओं के माध्यम से देश को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में प्रयास किए गए हैं।
    क्या पाना अभी बाकी है?
  7. रोजगार का बड़ा सवाल
    आर्थिक विकास के बावजूद युवाओं के लिए पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण रोजगार उपलब्ध कराना अभी भी सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। बेरोजगारी और कौशल विकास के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है।
  8. कृषि क्षेत्र की मजबूती
    किसानों की आय बढ़ाने, लागत कम करने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में अभी और व्यापक सुधारों की जरूरत महसूस की जाती है।
  9. शिक्षा और स्वास्थ्य की गुणवत्ता
    स्कूलों, कॉलेजों और सरकारी अस्पतालों तक पहुंच बढ़ी है, लेकिन गुणवत्ता, संसाधन और विशेषज्ञ मानवबल के स्तर पर अभी भी काफी सुधार की आवश्यकता है।
  10. सामाजिक समरसता
    विकास के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द, संवाद और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर जनविश्वास को और मजबूत करना समय की मांग है। विभिन्न मुद्दों पर राजनीतिक ध्रुवीकरण को कम करना भी महत्वपूर्ण चुनौती है।
  11. पर्यावरण और जल संकट
    तेजी से बढ़ते शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन के बीच जल संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और हरित विकास मॉडल को प्राथमिकता देना जरूरी है। हाल के वर्षों में मौसम संबंधी चुनौतियों ने इस आवश्यकता को और स्पष्ट किया है।
  12. छोटे कारोबारियों की चुनौतियां
    देश में व्यापार सुगमता बढ़ाने और डिजिटल व्यवस्था को प्रोत्साहन देने के प्रयास हुए हैं, लेकिन छोटे व्यापारियों और सूक्ष्म उद्यमों को अभी भी पूंजी, बढ़ती प्रतिस्पर्धा, कर अनुपालन और तकनीकी बदलावों के अनुरूप खुद को ढालने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय उद्योगों और पारंपरिक व्यवसायों को और अधिक समर्थन देने की आवश्यकता महसूस की जाती है।
  13. बढ़ती आर्थिक असमानता
    भारत दुनिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, लेकिन आर्थिक विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों तक समान रूप से पहुंचना अभी भी एक चुनौती है। एक ओर संपन्न वर्ग की आय और संपत्ति में वृद्धि हुई है, वहीं दूसरी ओर निम्न और मध्यम आय वर्ग के सामने महंगाई, रोजगार और आय वृद्धि से जुड़ी चिंताएं बनी हुई हैं। समावेशी विकास सुनिश्चित करना आने वाले वर्षों की बड़ी प्राथमिकता होगी।
  14. विकसित भारत 2047 का लक्ष्य
    सरकार ने 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य रखा है। इसके लिए केवल आर्थिक वृद्धि ही नहीं, बल्कि समान अवसर, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, तकनीकी नवाचार और समावेशी विकास सुनिश्चित करना होगा।
    निष्कर्ष
    नरेंद्र मोदी के 12 वर्षों का कार्यकाल भारतीय लोकतंत्र के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक दौरों में गिना जाएगा। इस दौरान देश ने डिजिटल परिवर्तन, बुनियादी ढांचे के विस्तार, कल्याणकारी योजनाओं और वैश्विक पहचान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। वहीं रोजगार, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक समरसता जैसे मुद्दे अभी भी गंभीर चिंतन और निरंतर प्रयास की मांग करते हैं।
    आने वाले वर्षों में सफलता का वास्तविक पैमाना केवल बड़े प्रोजेक्ट या आर्थिक आंकड़े नहीं होंगे, बल्कि यह होगा कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक कितनी प्रभावी ढंग से पहुंचता है। यही तय करेगा कि “विकसित भारत” का सपना कितनी जल्दी और कितनी मजबूती से साकार होता है।