उत्तराखण्ड के बेरोजगार युवाओं के लिए एक अच्छी खबर सामने आ रही है। जी हां.. यदि आप भी योग प्रशिक्षक हैं, और प्रशिक्षण लेने के बाद बेरोजगार घूम रहे हैं। तो यह खबर आपके लिए ही है। दरअसल उत्तराखण्ड सरकार ने आपके लिए नियुक्ति का रास्ता खोल दिया है जिससे उम्मीद जगी है कि जल्द ही सरकार योग प्रशिक्षकों को विद्यालय स्तर तक नियुक्त कर सकती है।

दरअसल उत्तराखण्ड सरकार ने एक शासनादेश जारी कर दिया है जिसके मुताबिक प्रदेश के 119 राजकीय महाविद्यालयों और राज्य विश्वविद्यालयों में 123 योग प्रशिक्षकों की तैनाती की जाएगी। बताया गया है कि इन महाविद्यालयों में योग प्रशिक्षकों को संविदा पर अस्थायी रूप से 11 माह के लिए तैनात किया जाएगा तथा उन्हें 300 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से या अधिकतम 18 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा।
आपको बता दें कि इस संबंध में राज्य के उच्च शिक्षा सचिव शैलेश बगौली की ओर से आदेश जारी किए गए हैं। शिक्षा सचिव की ओर से यह आदेश विभागीय मंत्री डॉ. धन सिंह रावत की ओर से जारी दिशा निर्देशों के बाद जारी किए गए हैं । जिसमें कहा गया है कि अस्थाई रूप से नियुक्त होने वाले इन 123 योग प्रशिक्षकों से महाविद्यालयों में प्राचार्य अथवा कुलसचिव की ओर से निर्धारित समय में न्यूनतम तीन घंटे अध्यापन कार्य लिया जाएगा।
जिससे ये योग का प्रचार-प्रसार कर सकें। आपको बता दें कि योग प्रशिक्षक बनने के लिए न्यूनतम अर्हता भी लागू की गई है। जिसके मुताबिक योग्य अभ्यर्थियों के पास किसी मान्यता प्राप्त विवि से योग, योग विज्ञान, योग चिकित्सा या योग शिक्षा में पीजी या एक वर्षीय डिप्लोमा या समकक्ष उपाधि होनी अनिवार्य है। इसके अलावा योग शिक्षा में अध्यापन व प्रशिक्षण का दो वर्ष का अनुभव होना चाहिए।
