एसएससी ऑनलाइन परीक्षा घोटाला: देशभर की 100 से अधिक लैब जांच के घेरे में

देहरादून। एसएससी ऑनलाइन परीक्षा में नकल कराने के मामले की जांच अब बेहद अहम मोड़ पर पहुंच गई है। एसटीएफ की गिरफ्त में आए आरोपियों ने ऐसे चौंकाने वाले खुलासे किए हैं, जिनसे देशभर की सैकड़ों परीक्षा लैब संदेह के घेरे में आ गई हैं। जांच एजेंसियों को आशंका है कि परीक्षा केंद्रों के सेटअप के दौरान ही ऐसी तकनीकी सेटिंग की गई थी, जिससे ऑनलाइन परीक्षाओं में आसानी से नकल कराई जा सके। इस पूरे खेल में परीक्षा आयोजित कराने वाली कंपनी के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत की भी संभावना जताई जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, आगामी एक परीक्षा में गड़बड़ी की आशंका के चलते पुलिस ने एक परीक्षा केंद्र (लैब) को बंद भी करा दिया है। उल्लेखनीय है कि फरवरी माह में एमकेपी परिसर स्थित महादेव डिजिटल जोन नामक लैब में पहली बार गड़बड़ी सामने आई थी। इसके बाद से एसटीएफ लगातार जांच में जुटी हुई है और अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पूछताछ में सभी की अलग-अलग भूमिकाएं उजागर हुई हैं।

बीते शुक्रवार को गिरफ्तार किए गए आरोपी ईश्वरी प्रसाद ने एसटीएफ के सामने कई अहम खुलासे किए। उसने बताया कि वर्ष 2024 में योगेश उर्फ योगी उर्फ इंद्रजीत उर्फ जैक के कहने पर उसने लैब सेटअप करने का काम शुरू किया था। बदले में उसे होने वाले मुनाफे का 30 प्रतिशत हिस्सा देने का लालच दिया गया। इसके बाद उसने सबसे पहले महादेव डिजिटल जोन नाम से लैब स्थापित की। जब वहां गड़बड़ी उजागर हुई तो वह फरार हो गया था।

जांच में आरोपी ने यह भी स्वीकार किया कि वह उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हैदराबाद, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश समेत कई राज्यों में 500 से अधिक लैब स्थापित कर चुका है। हालांकि, इनमें से कुछ चुनिंदा लैब में ही विशेष तकनीकी सेटिंग की गई थी। जांच एजेंसियों को आशंका है कि ऐसी लैबों की संख्या 100 से अधिक हो सकती है।

बताया जा रहा है कि इस पूरी प्रक्रिया के लिए ईश्वरी प्रसाद को कंपनी के कुछ कर्मचारियों ने ही चुना था। लैब सेटअप के दौरान इथरनेट केबल को यूपीएस सर्वर रूम के एक विशेष चेंबर से जोड़ा जाता था। इसके जरिए नकल माफिया के गुर्गे परीक्षा केंद्र के सिस्टम का रिमोट एक्सेस अपने हाथ में ले लेते थे।

इस तकनीक के माध्यम से परीक्षार्थी अपनी स्क्रीन पर प्रश्नपत्र देखता था, लेकिन उत्तर कहीं और बैठे लोग दर्ज करते थे। बाहर बैठे ऑपरेटर पूरे सिस्टम को रिमोट एक्सेस से नियंत्रित करते थे और सीधे उत्तर भरते थे। इस तरह परीक्षार्थी बिना उत्तर दिए परीक्षा पास कर जाता था।

जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह केवल कंप्यूटर सिस्टम ही नहीं, बल्कि सीसीटीवी कैमरों की लाइव फीड पर भी नियंत्रण रखता था। सीसीटीवी सर्वर की केबल को भी सर्वर रूम के चेंबर तक पहुंचाया जाता था, ताकि कैमरों की निगरानी और रिकॉर्डिंग में मनमानी की जा सके। जरूरत पड़ने पर कैमरे बंद कर दिए जाते थे या उनकी फीड में छेड़छाड़ की जाती थी।

एसटीएफ के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क में ईश्वरी प्रसाद के अलावा कई अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आई है। एजेंसी अब फरार आरोपियों और इस रैकेट से जुड़े अन्य तकनीकी विशेषज्ञों की तलाश में जुटी हुई है।