

देहरादून। स्कूल के मेले में खिलौनों और गुब्बारों पर लगाए गए सटीक निशानों ने 10 साल की धारिका पंत के पिता को बेटी की प्रतिभा पहचानने का मौका दिया। पिता ने जब बेटी के हाथ में निशानेबाजी का हुनर देखा तो उसे तराशने के लिए प्रशिक्षण दिलाना शुरू किया। कुछ समय के अभ्यास के बाद धारिका ने अपनी मेहनत का शानदार परिणाम देते हुए 24वीं उत्तराखंड राज्य शूटिंग चैंपियनशिप में शॉटगन ट्रैप महिला सब-यूथ वर्ग का स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।
मेले में दिखी निशानेबाजी की प्रतिभा
धारिका के पिता मयंक शेखर पंत आईटीबीपी में सेकंड-इन-कमांड अधिकारी हैं और देहरादून के सीमाद्वार में रहते हैं। उन्होंने बताया कि धारिका एशियन स्कूल में कक्षा छह की छात्रा है। इसी साल जनवरी में स्कूल में मेले का आयोजन हुआ था। मेले में धारिका ने खिलौनों और गुब्बारों पर निशाना लगाने की जिद की।
पहली बार 20 रुपये देकर निशाना लगाने का मौका मिला। धारिका ने तीन निशाने सटीक लगाए, जबकि एक निशाना चूक गया। इसके बाद दोबारा 20 रुपये देकर निशाना लगाने को कहा गया तो इस बार उसने चारों निशाने बिल्कुल सटीक लगाए।
पिता को दिखा अपना अधूरा सपना
धारिका की प्रतिभा देखकर पिता मयंक को लगा कि उनकी बेटी उनके निशानेबाजी के अधूरे सपने को पूरा कर सकती है। उन्होंने बेटी को प्रशिक्षण दिलाना शुरू किया। लगातार अभ्यास के बाद धारिका ने राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा साबित कर दी।
पिता को भी था निशानेबाजी का शौक
मयंक शेखर पंत बताते हैं कि उन्हें भी निशानेबाजी का शौक था, लेकिन उन्हें इसे करियर के रूप में आगे बढ़ाने का अवसर नहीं मिल पाया। हालांकि, आईटीबीपी में रहते हुए वह निशानेबाजी करते हैं। अब बेटी की सफलता ने उनके उस अधूरे सपने को नई उम्मीद दी है।
