


उत्तराखंड में आने वाले 10 वर्षों में बिजली की मांग में बड़ा इजाफा होने का अनुमान है। राज्य में वर्ष 2035-36 तक बिजली की वार्षिक मांग बढ़कर 2635.2 करोड़ यूनिट तक पहुंच सकती है। बढ़ती मांग को देखते हुए राज्य सरकार और उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने दीर्घकालिक ऊर्जा योजना पर काम शुरू कर दिया है।
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2026-27 में उत्तराखंड की पीक बिजली मांग 2883 मेगावाट रहने का अनुमान है। यह मांग वर्ष 2030-31 तक बढ़कर 3332 मेगावाट और वर्ष 2035-36 तक 4113 मेगावाट तक पहुंच सकती है।

इसी तरह राज्य की वार्षिक ऊर्जा आवश्यकता भी तेजी से बढ़ने की संभावना जताई गई है। वर्ष 2026-27 में जहां ऊर्जा आवश्यकता 1755.7 करोड़ यूनिट आंकी गई है, वहीं 2035-36 तक इसके 2635.2 करोड़ यूनिट तक पहुंचने का अनुमान है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि बिजली की चुनौती केवल दिन के समय तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि रात और शाम के समय भी बिजली की मांग अधिक रहेगी। वर्ष 2026-27 में सौर ऊर्जा उपलब्ध रहने के दौरान राज्य की पीक मांग 2651 मेगावाट रहने का अनुमान है, जबकि रात और गैर-सौर घंटों में यह बढ़कर 2763 मेगावाट तक पहुंच सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए राज्य को अभी से पर्याप्त बिजली उत्पादन, भंडारण और आपूर्ति व्यवस्था पर ध्यान देना होगा। इसी दिशा में उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की तर्ज पर दीर्घकालिक राष्ट्रीय संसाधन पर्याप्तता योजना तैयार कर रहा है।
उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग के सचिव नीरज सती ने बताया कि राज्य के लिए दीर्घकालिक संसाधन योजना पर कार्य शुरू कर दिया गया है, ताकि भविष्य में बिजली संकट की स्थिति उत्पन्न न हो।
