


उत्तराखंड में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को मजबूत करने के लिए सरकार अब शराब की बोतलों पर नया उपकर (सेस) लगाने की तैयारी कर रही है। प्रस्ताव के तहत प्रत्येक शराब की बोतल पर एक रुपये का अतिरिक्त सेस लगाया जाएगा। इससे जुटाई जाने वाली राशि का उपयोग प्रदेश के सभी 108 नगर निकायों में कचरा प्रबंधन और उसके निस्तारण के कार्यों पर किया जाएगा।
प्रदेश में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन लंबे समय से बड़ी चुनौती बना हुआ है। मैदानी क्षेत्रों के नगर निकाय संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं, जबकि पर्वतीय क्षेत्रों में कचरा संग्रहण और निस्तारण के लिए भारी बजट की आवश्यकता पड़ती है। इसी को देखते हुए शहरी विकास विभाग ने फंड जुटाने के लिए यह नई व्यवस्था प्रस्तावित की है।

नितेश कुमार झा ने बताया कि निकायों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और उससे जुड़े रोजमर्रा के खर्चों के लिए विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर लिया है। इसे जल्द ही मुख्य सचिव के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। उनका कहना है कि उद्देश्य निकायों में कचरा प्रबंधन व्यवस्था को अधिक मजबूत और प्रभावी बनाना है।
वर्तमान में राज्य सरकार आबकारी नीति के तहत शराब की प्रत्येक बोतल पर तीन रुपये का सेस वसूलती है। इसमें एक रुपया गो सेवा, एक रुपया महिला कल्याण और एक रुपया खेल गतिविधियों के लिए उपयोग किया जाता है। अब शहरी विकास विभाग के लिए एक और रुपया जोड़ने की तैयारी है। आबकारी विभाग इस राशि को अतिरिक्त शुल्क के रूप में एकत्र करता है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में प्रतिदिन लगभग 2100 टन से अधिक ठोस अपशिष्ट निकलता है। इसका बड़ा हिस्सा अब भी लैंडफिल साइटों पर जमा किया जा रहा है। राज्य में 60 से अधिक डंपिंग साइट मौजूद हैं, जहां करीब 23 लाख मीट्रिक टन पुराना कचरा जमा है। वर्तमान में केवल 40 से 45 प्रतिशत ठोस अपशिष्ट का ही प्रभावी प्रबंधन हो पा रहा है, जबकि कचरे के बढ़ते ढेर प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती बने हुए हैं।
