
सफीपुर। कभी बुनियादी संसाधनों के अभाव से जूझ रहा राजकीय प्राथमिक विद्यालय सफीपुर आज शिक्षा के नए मॉडल के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुका है। इस उल्लेखनीय परिवर्तन के पीछे विद्यालय की प्रभारी शिक्षिका रेखा बुडकोटी की अथक मेहनत, सकारात्मक सोच और दृढ़ संकल्प की अहम भूमिका रही है।

शिक्षिका रेखा बुडकोटी ने स्कूल प्रभारी का कार्यभार संभालते ही यह संकल्प लिया कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, बच्चों की शिक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। शुरुआती दौर में विद्यालय को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। बच्चों की पढ़ाई में कम रुचि, अभिभावकों की उदासीनता और संसाधनों की भारी कमी बड़ी बाधाएं थीं।
लेकिन निरंतर प्रयासों और एक एनजीओ के सहयोग से विद्यालय का स्वरूप पूरी तरह बदल गया। स्कूल में स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर लैब, खेल का मैदान और खेल उपकरणों की व्यवस्था की गई। दीवारों पर संदेशात्मक और पाठ्यक्रम आधारित चित्र बनाए गए, जिससे बच्चों को खेल-खेल में अक्षर ज्ञान, गणित और सामान्य ज्ञान सिखाया जाने लगा। डिजिटल संसाधनों के उपयोग से पढ़ाई को और अधिक रोचक बनाया गया।
परिणामस्वरूप, अब छात्र न केवल नियमित रूप से विद्यालय पहुंच रहे हैं, बल्कि शैक्षणिक प्रदर्शन में भी उल्लेखनीय सुधार दिखा रहे हैं। पहले जहां कई अभिभावक बच्चों को नियमित रूप से स्कूल नहीं भेजते थे, वहीं अब वे स्वयं बच्चों की पढ़ाई में रुचि लेने लगे हैं।
विद्यालय में स्वच्छता, पौधारोपण और नैतिक शिक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आज स्कूल परिसर साफ-सुथरा और आकर्षक दिखाई देता है, जो आसपास के विद्यालयों के लिए प्रेरणा का केंद्र बन चुका है।
रेखा बुडकोटी की यह पहल दर्शाती है कि यदि संकल्प मजबूत हो तो सीमित संसाधनों में भी बदलाव की नई इबारत लिखी जा सकती है।
