
देहरादून। फिल्मों में सुना जाने वाला डायलॉग “तू अगर मेरी नहीं हो सकती तो किसी की भी नहीं हो सकती” इस बार हकीकत में तब्दील हो गया। आरोपी आकाश ने इसी फिल्मी अंदाज़ में गुंजन को धमकी दी थी और फिर दूल्हा बाजार में दिनदहाड़े उसकी निर्मम हत्या कर दी। यह वारदात न सिर्फ एक युवती की हत्या है, बल्कि समाज की संवेदनहीनता पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है।

मच्छी बाजार में जिस समय गुंजन पर हमला हुआ, उस वक्त आसपास 30 से 40 लोग मौजूद थे। गली में चीख-पुकार सुनकर और भी लोग मौके पर पहुंचे, लेकिन किसी ने भी आगे बढ़कर गुंजन को बचाने की हिम्मत नहीं दिखाई। यह कहना है गुंजन की सहेली पायल का, जो उस समय मौके पर मौजूद थी।
पायल ने बताया कि वह इकलौती थी जिसने हत्यारोपी आकाश को धक्का देकर गुंजन को बचाने की कोशिश की। लेकिन आकाश के हाथ में चापड़ देखकर वह डर गई। आकाश ने पायल की ओर भी चापड़ लहराया, जिससे वह सहम गई। इसके बावजूद उसने आसपास मौजूद लोगों से गुहार लगाई, लेकिन कोई भी मदद के लिए आगे नहीं आया।
गुंजन की मौत से गहरे सदमे में पायल अगले दिन भी गुंजन के परिजनों के साथ रही। वह कभी गुंजन की मां के आंसू पोंछती दिखी तो कभी भाई अंश को संभालती रही। अमर उजाला से बातचीत में पायल ने बताया कि घटना से कुछ देर पहले तक सब कुछ सामान्य था। गुंजन रोज की तरह गली में गाड़ी खड़ी करने आई थी। उसने पायल से मुलाकात भी की थी, लेकिन जल्दबाजी के कारण घर के अंदर नहीं आई।
कुछ ही देर बाद चीखने की आवाज सुनकर पायल बाहर दौड़ी तो देखा कि आकाश गुंजन पर लगातार चापड़ से वार कर रहा था। हमले के बाद आकाश भीड़ के बीच से ही फरार हो गया। न किसी ने उसे पकड़ने की कोशिश की और न ही रोकने की। अन्य प्रत्यक्षदर्शियों ने भी इस बात की पुष्टि की है।
परिजनों के अनुसार, आकाश लंबे समय से गुंजन को परेशान कर रहा था। उसके इरादों की जानकारी दोनों परिवारों को थी। गुंजन के भाई अंश ने बताया कि आरोपी की पत्नी ने भी फोन कर चेतावनी दी थी कि आकाश धारदार हथियार लेकर घूम रहा है और गुंजन पर हमला कर सकता है। आकाश पहले भी इस तरह की धमकियां दे चुका था, लेकिन बार-बार की धमकियों को किसी ने गंभीरता से नहीं लिया—और यही लापरवाही गुंजन की जान ले गई।

