नेतन्याहू सरकार के ख़िलाफ़ पूरे इसराइल के कई शहरों में प्रदर्शन हुए हैं. ये व्यापक प्रदर्शन हाल में दक्षिणी ग़ज़ा में छह बंधकों की लाशों की बरामदगी के साथ शुरू हुए थे.
विरोध प्रदर्शन करने वाले प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं.उनका कहना है कि नेतन्याहू सिर्फ़ अपना राजनीतिक वजूद बचाए रखने के लिए युद्धविराम (इसराइल और हमास के बीच) और बंधकों की रिहाई के लिए होने वाले समझौते को रोक रहे हैं.
हमास से युद्ध को लेकर नेतन्याहू की रणनीति को बंधकों के परिजन पहले ही ख़ारिज कर चुके हैं. लेकिन पिछले दिनों जब बंधकों की लाशें बरामद हुईं तो परिजनों का ग़ुस्सा फूट पड़ा.
इसराइली सेना ने ये लाशें दक्षिणी ग़ज़ा के रफ़ाह शहर की एक भूमिगत सुरंग से बरामद की थीं.
इन लोगों की पहचान कारमेल गैत, इडेन यरुशालमी, हर्श गोल्डबर्ग-पोलिन, एलेक्ज़ेंडर लोबानोव, अल्मोग सारुसू और मास्टर सार्जेंट ओरी डेनिनो के तौर पर हुई थी.
कहा जा रहा था कि इनमें से तीन को जुलाई में युद्धविराम पर पहले दौर की बातचीत के दौरान छोड़ा जाना था.
नेतन्याहू के ख़िलाफ़ आक्रामक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं

नेतन्याहू के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन कर रहे लोग जिन तख्तियों के साथ नारे लगा रहे थे, उन पर लिखा था, ”आप सरकार के मुखिया हैं, इसलिए आरोप भी आप पर ही लगेगा.”
इसराइल पर पिछले साल सात अक्टूबर के हमले के बाद से 11 महीने बीत चुके हैं. लेकिन अब भी ग़ज़ा में हमास के क़ब्ज़े में 97 बंधक क़ैद हैं. माना जा रहा है कि इनमें से 33 की मौत हो चुकी है.
प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि हमास के साथ युद्धविराम का समझौता हो ताकि बाकी बचे 97 बंधकों को छुड़ाया जा सके.
नेतन्याहू पर दबाव बढ़ता जा रहा है कि वह हमास के नियंत्रण से इसराइली बंधकों को छुड़ाएं
अक्टूबर 2023 के बाद यह इसराइल में सबसे बड़ी आम हड़ताल है. हड़ताल कराने में इसराइल की प्रमुख ट्रेड यूनियन हिस्टाड्रट की सबसे अहम भूमिका रही है.
बंधकों और लापता लोगों के परिवार वालों के फोरम ने आम लोगों से विशाल प्रदर्शन में हिस्सा लेने की अपील करते हुए कहा कि वो पूरे देश को ठप कर दें. इसके बाद कई सार्वजनिक सेवाएं बाधित हुईं और प्रमुख सड़कों पर आवाजाही में अड़चनें आईं.
इसराइल में विपक्ष के नेता और पूर्व प्रधानंत्री येर लैपिड प्रदर्शनकारियों के समर्थन में आगे आए हैं. उन्होंने कहा कि वे सभी इसराइली, जिनके दिल बंंधकों की मौत की ख़बरों से टूट गए हैं, वो प्रदर्शनकारियों का साथ देने के लिए आगे आएं.
नेतन्याहू सरकार ने क्या किया

बिन्यामिन नेतन्याहू ने इस आरोप को ख़ारिज कर दिया है कि उन्होंने ही युद्धविराम के लिए समझौते की कोशिश रोक दी है. उन्होंने इसके लिए सीधे हमास को दोषी ठहराया है.
उन्होंने कहा कि इसराइल तब तक चैन से नहीं बैठेगा, जब तक कि इन मौतों के लिए ज़िम्मेदार लोगों को पकड़ न लिया जाए.
हमास के अधिकारी इज़्ज़-अल-रिश्क ने कहा है कि इसराइल युद्धविराम के लिए समझौते पर राज़ी नहीं था. यही इन मौतों की वजह है. हालांकि उन्होंने इस बात का सीधा जवाब नहीं दिया कि बंधक कैसे मारे गए.
स्कूल, एयरपोर्ट और बैंकों में कामकाज़ में रुकावट को देखते हुए इसराइल के लेबर कोर्ट ने दोपहर दो बजे तक आम हड़ताल रोकने का निर्देश दिया था. लेकिन प्रदर्शनकारी शाम तक डटे रहे. पहले दो दिनों की हड़ताल का आह्वान किया गया था.
इसरइल के वित्त मंत्री बेज़ालेल स्मोतरिच अपने धुर दक्षिणपंथी विचारों के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने इस हड़ताल को ग़ैरक़ानूनी क़रार देते हुए कोर्ट के आदेश का स्वागत किया है.
इसराइल के रक्षा मंत्री योआव गैलांत काफ़ी पहले से नेतन्याहू से युद्धविराम के बात करने के लिए अपील करते रहे हैं.
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसराइल की रक्षा कैबिनेट से नेतन्याहू की सौदेबाजी की मांग को पलटने की अपील करते हुए लिखा, ”जो अपहृत निर्ममतापूर्वक मार दिए गए हैं, उनके लिए (बातचीत की पहल) बहुत देर हो चुकी है. जो फ़िलहाल हमास की क़ैद में हैं, उनका घर लौटना ज़रूरी है.’’
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