

देहरादून : 213 किलोमीटर लंबा देहरादून–दिल्ली एक्सप्रेसवे सिर्फ तेज़ रफ्तार कनेक्टिविटी का ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और विकास के संतुलन का भी एक बेहतरीन उदाहरण बनकर उभरा है। इस परियोजना की सबसे अधिक चर्चा वन्यजीवों के लिए बनाए गए अंडरपास को लेकर हो रही है, जिसने विकास योजनाओं में जैव विविधता को प्राथमिकता देने का मजबूत संदेश दिया है।

उत्तराखंड जैसे राज्य, जहां 70% से अधिक क्षेत्र वन भूमि है, वहां विकास परियोजनाओं के लिए भूमि हस्तांतरण और पेड़ों की कटाई एक बड़ी चुनौती रहती है। लेकिन इस एक्सप्रेसवे परियोजना में इन चुनौतियों का समाधान सोच-समझकर निकाला गया।

परियोजना के तहत करीब 12 किलोमीटर लंबा अंडरपास तैयार किया गया है, जिससे वन्यजीवों के प्राकृतिक आवागमन में कोई बाधा न आए। यह कदम न केवल जानवरों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है, बल्कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को भी कम करने में मददगार है।
इसके अलावा, एलिवेटेड सड़क निर्माण के दौरान पेड़ों की कटाई कम से कम हो, इसके लिए सड़क को नदी तल के बीच में डिजाइन किया गया। जहां पहले लगभग 45 हजार पेड़ों के कटने की आशंका थी, वहीं इस रणनीति से इसे घटाकर केवल 11,160 पेड़ों तक सीमित कर दिया गया।
यह परियोजना स्पष्ट करती है कि अगर सही योजना और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाया जाए, तो विकास और प्रकृति संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं। देहरादून–दिल्ली एक्सप्रेसवे आने वाले समय में ऐसी परियोजनाओं के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल साबित हो सकता है।

