चारधाम यात्रा में जल्दबाजी बनी हादसे की वजह!, देवप्रयाग दुर्घटना में तीन की तलाश जारी

देवप्रयाग,
ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर देवप्रयाग के समीप मंगलवार सुबह हुए भीषण सड़क हादसे ने राजस्थान के जैसलमेर के दो परिवारों की खुशियों को मातम में बदल दिया। प्रारंभिक जांच और परिस्थितियों को देखते हुए दुर्घटना के पीछे चारधाम यात्रा को निर्धारित समय से पहले पूरा करने की जल्दबाजी को एक प्रमुख कारण माना जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, उत्तराखंड सरकार और प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए चारधाम यात्रा के लिए कम से कम 10 दिनों का व्यवस्थित यात्रा शेड्यूल निर्धारित किया है, ताकि वाहन चालकों को पर्याप्त आराम मिल सके और पर्वतीय मार्गों पर सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित हो सके। इसके बावजूद उत्तराखंड नंबर की एक कार 27 मई को आठ यात्रियों को लेकर चारधाम यात्रा पर निकली और सातवें दिन ही सुबह बदरीनाथ धाम से दर्शन कर लौटते हुए देवप्रयाग तक पहुंच गई।

कयास लगाए जा रहे हैं कि 10 दिन की यात्रा को सात दिन में पूरा करने की जल्दबाजी और लगातार लंबी दूरी तय करने के कारण चालक पर दबाव बढ़ा, जो दुर्घटना की एक संभावित वजह हो सकती है। हालांकि हादसे के वास्तविक कारणों की जांच अभी जारी है।

इधर हादसे में गंभीर रूप से घायल 12 वर्षीय आयुष्मान की हालत अब स्थिर बताई जा रही है। बेस अस्पताल के चिकित्सकों की लगातार दो दिनों की मेहनत के बाद उसे होश आ गया है। हालांकि वह अभी बोल नहीं पा रहा था। बेस अस्पताल के आईसीयू नर्सिंग इंचार्ज विवेक त्यागी ने बताया कि आयुष्मान के सिर, हाथ और पैर में गंभीर चोटें आई हैं तथा पैर में फ्रैक्चर भी हुआ है। हालत में सुधार होने पर वह अपने पिता से इशारों में संवाद करने लगा था।

बेहतर उपचार के लिए परिजनों के अनुरोध पर प्रशासन ने उसे हेलीकॉप्टर सेवा के माध्यम से एम्स ऋषिकेश रेफर कर दिया है।

वहीं हादसे में लापता श्रद्धालुओं की तलाश के लिए तीसरे दिन भी सर्च ऑपरेशन जारी रहा। अब तक गंगा नदी से चार शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि तीन अन्य लोगों की तलाश अभी भी जारी है। थाना प्रभारी प्रशांत बहुगुणा ने बताया कि एसडीआरएफ और गोताखोरों की टीम गंगा में लापता गुड्डी देवी, जाह्नवी और नम्रता की खोज में जुटी हुई है।

प्रशासन का कहना है कि सर्च अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक सभी लापता लोगों का पता नहीं चल जाता। हादसे ने एक बार फिर पर्वतीय मार्गों पर सुरक्षित और निर्धारित यात्रा कार्यक्रम का पालन करने की आवश्यकता को रेखांकित किया है।