मानसून की सुस्त रफ्तार से गंगा का जलस्तर घटा, सिंचाई और पेयजल आपूर्ति पर संकट के संकेत

मानसून की धीमी रफ्तार और अपेक्षित वर्षा नहीं होने का असर अब गंगा के जलस्तर पर साफ दिखाई देने लगा है। यूपी सिंचाई विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष जुलाई के प्रथम सप्ताह की तुलना में इस बार गंगा के जलप्रवाह में 50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। जहां पिछले वर्ष जलप्रवाह एक लाख क्यूसेक के करीब पहुंच गया था, वहीं इस वर्ष यह घटकर लगभग 45 हजार क्यूसेक रह गया है।

विभागीय आंकड़ों के अनुसार अप्रैल से जून 2026 के दौरान भी नदियों में औसतन 30 प्रतिशत कम पानी बहा, जिससे जल संकट की आशंका और गहरा गई है। गंगा के जलस्तर में कमी का सीधा असर रुड़की की गंगनहर पर पड़ रहा है। इसी नहर से हरिद्वार सहित उत्तर प्रदेश के कई जिलों में सिंचाई होती है, जबकि दिल्ली की पेयजल आपूर्ति भी इसी पर निर्भर करती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पानी की कमी से गन्ना, धान और अन्य खरीफ फसलों की सिंचाई प्रभावित हो सकती है। साथ ही भूजल रिचार्ज की गति धीमी पड़ने से आने वाले महीनों में नलकूपों और हैंडपंपों के जलस्तर में भी गिरावट की संभावना है। यदि यही स्थिति बनी रही तो कृषि उत्पादन, पेयजल आपूर्ति और पर्यावरणीय संतुलन पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

यूपी सिंचाई विभाग के अधिकारी लगातार गंगा के जलस्तर की निगरानी कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि आगामी दिनों में मानसून सक्रिय होता है तो स्थिति में सुधार संभव है, लेकिन फिलहाल उपलब्ध आंकड़े जल संकट की गंभीर चेतावनी दे रहे हैं।