

देहरादून के सरकारी अस्पतालों में एंटी रेबीज वैक्सीन की भारी कमी सामने आई है। कोरोनेशन अस्पताल, प्रेमनगर उपजिला चिकित्सालय और रायपुर सीएचसी में वैक्सीन का स्टॉक खत्म होने से मरीजों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालत यह है कि कुत्तों के हमले से बचने के बाद अब लोग वैक्सीन के लिए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकने को मजबूर हैं।

जानकारी के अनुसार, कोरोनेशन अस्पताल में पिछले करीब सात दिनों से एंटी रेबीज वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, जबकि यहां प्रतिदिन 10 से 12 लोग कुत्तों के काटने के मामले में पहुंचते हैं। वहीं प्रेमनगर उपजिला चिकित्सालय में भी पिछले दो दिनों से वैक्सीन की डोज नहीं लग पा रही है, जिससे रोजाना करीब 45 मरीजों को बैरंग लौटना पड़ रहा है या उन्हें निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। कुछ मरीजों को दून अस्पताल रेफर किया जा रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि निदेशालय से लंबे समय से वैक्सीन की आपूर्ति नहीं हो पाई है। पहले थोक विक्रेताओं से वैक्सीन लेकर काम चलाया जा रहा था, लेकिन अब उन्होंने भी स्टॉक खत्म होने की बात कहकर आपूर्ति बंद कर दी है। इससे सरकारी अस्पतालों में संकट और गहरा गया है।
स्थिति इसलिए भी गंभीर हो गई है क्योंकि इन दिनों कुत्तों का प्रजनन काल चल रहा है, जिससे उनके आक्रामक होने की घटनाएं बढ़ गई हैं। प्रेमनगर उपजिला चिकित्सालय के सीएमएस डॉ. परमार्थ जोशी के अनुसार, पहले जहां रोज 25 से 30 मामले आते थे, अब यह संख्या बढ़कर 50 तक पहुंच गई है। वैक्सीन की मांग निदेशालय को भेज दी गई है।
निजी अस्पतालों में महंगा इलाज:
सरकारी अस्पतालों में वैक्सीन न मिलने के कारण लोगों को निजी अस्पतालों में इलाज कराना पड़ रहा है, जहां एंटी रेबीज की चार डोज के लिए 1000 से 1500 रुपये तक खर्च करना पड़ रहा है। इससे आम लोगों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है।
बिल्ली और चूहे के काटने के मामले भी बढ़े:
इन दिनों सिर्फ कुत्तों के काटने ही नहीं, बल्कि बिल्ली और चूहे के काटने के मामले भी सामने आ रहे हैं। दून अस्पताल के आपात चिकित्सा अधिकारी डॉ. अमित अरुण के अनुसार, प्रतिदिन 5 से 6 ऐसे मामले भी आ रहे हैं, जबकि अन्य अस्पतालों से भी मरीज रेफर होकर पहुंच रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग के लिए यह स्थिति बड़ी चुनौती बन गई है और लोगों को जल्द राहत देने के लिए वैक्सीन की आपूर्ति बहाल करना बेहद जरूरी हो गया है।
