

चमोली। टीएचडीसी की पीपलकोटी-विष्णुगाड जल विद्युत परियोजना की निर्माणाधीन टनल में हुए हादसे में घायल एक और श्रमिक की मौत हो गई। एम्स ऋषिकेश में उपचार के दौरान श्रमिक ने दम तोड़ दिया। इसके साथ ही इस दर्दनाक हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर 11 हो गई है।
यह हादसा 13 अगस्त की शाम करीब 6:30 बजे निर्माणाधीन टनल के करीब डेढ़ किलोमीटर अंदर हुआ था। भारी भूस्खलन और पहाड़ी से लगातार पानी के रिसाव के कारण टनल के अंदर 22 श्रमिक फंस गए थे। घटना के तुरंत बाद बचाव अभियान शुरू किया गया, जिसमें 12 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। सभी घायलों को उपचार के लिए जिला अस्पताल गोपेश्वर में भर्ती कराया गया था।
रेस्क्यू अभियान के दौरान पहले दिन चार श्रमिकों के शव बरामद हुए। इसके बाद 14 अगस्त को तीन अन्य शव मिले, जबकि 15 अगस्त को एक और श्रमिक का शव बरामद किया गया। मंगलवार को भी टनल से दो श्रमिकों के शव निकाले गए। उनकी पहचान 31 वर्षीय लुकासा टोपनों निवासी झारखंड और चेतन पोयाम निवासी छत्तीसगढ़ के रूप में हुई।
टनल के भीतर करीब 117 घंटे तक लगातार बचाव अभियान चलाया गया। अंदर भारी मात्रा में पानी और कीचड़ जमा होने के कारण राहत एवं बचाव कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। पानी और कीचड़ को बाहर निकालने के लिए पंपों का सहारा लिया गया। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के जवान विकट परिस्थितियों में बारी-बारी से टनल के अंदर जाकर सर्च ऑपरेशन चलाते रहे। अभियान के दौरान टनल में फंसी मशीनों को भी बाहर निकाला गया।
जिलाधिकारी चमोली गौरव कुमार के अनुसार, हादसे में कुल 10 लोगों की मौत हुई थी, जबकि एक घायल श्रमिक की इलाज के दौरान मौत होने के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 11 हो गई है।
इधर, हादसे के बाद पहाड़ों में चल रही जल विद्युत परियोजनाओं को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। उत्तराखंड क्रांति दल के केंद्रीय प्रवक्ता सत्य प्रकाश सती ने पहाड़ों में हाइड्रो प्रोजेक्ट को तत्काल बंद करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पहाड़ों में संचालित हो रही ऐसी परियोजनाएं लोगों के लिए खतरा बनती जा रही हैं और इनके कारण पहाड़ों की संरचना कमजोर हो रही है। उनका आरोप है कि इन परियोजनाओं से स्थानीय लोगों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा, जबकि पर्यावरण और जनजीवन को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
