
नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में लापता होने वाली महिलाओं की संख्या पुरुषों के मुकाबले लगातार अधिक बनी हुई है। जनवरी 2026 के ताजा आंकड़े इस गंभीर स्थिति की ओर इशारा करते हैं। इस महीने कुल 1777 लोग लापता हुए, जिनमें 1116 महिलाएं और 661 पुरुष शामिल हैं। चिंताजनक तथ्य यह है कि महिलाओं के मिलने का प्रतिशत पुरुषों की तुलना में काफी कम रहा।

दिल्ली पुलिस के अनुसार जनवरी 2026 में लापता हुए लोगों में से केवल 625 यानी 35.39 प्रतिशत लोगों का ही पता चल सका। 661 लापता पुरुषों में से 275 (41.60 फीसदी) मिल गए, जबकि 1116 लापता महिलाओं में से सिर्फ 354 (31.72 फीसदी) का ही पता चल पाया। इसका अर्थ यह है कि अब भी 1148 लोग यानी 64.60 प्रतिशत लोग लापता हैं, जिनमें 68.72 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं।
हालांकि सालाना आधार पर लापता मामलों की संख्या में कुछ गिरावट जरूर दर्ज की गई है। वर्ष 2024 में 10,141 लोग लापता हुए थे, जबकि 2025 में यह संख्या घटकर 9,638 रह गई। इसके बावजूद मिलने की दर में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है।
सालाना आंकड़े बताते हैं तस्वीर
- 2023: 24,481 लापता, 17,599 मिले
- 2024: 24,893 लापता, 16,416 मिले
- 2025: 24,508 लापता, 15,421 मिले
दिल्ली पुलिस का कहना है कि राजधानी में लापता मामलों का फ्री रजिस्ट्रेशन सिस्टम लागू है। किसी के लापता होने की सूचना मिलते ही तुरंत मामला दर्ज किया जाता है, भले ही वह कुछ समय बाद घर लौट आए। कई मामलों में लोग वापस लौटने के बाद पुलिस को सूचना नहीं देते, जिससे डाटा में लापता मामलों की संख्या अधिक दिखाई देती है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि दिल्ली में बच्चों या महिलाओं की चोरी करने वाला कोई संगठित गिरोह सक्रिय नहीं है।
45 लोग लौटे घर, पुलिस ने किया संपर्क
विशेष पुलिस आयुक्त (अपराध शाखा) देवेश चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि 2024, 2025 और 2026 में लापता हुए लोगों के मामलों की समीक्षा के दौरान 341 लोगों से फोन पर संपर्क किया गया, जिनमें से 45 लोग अपने घर लौट चुके थे। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि लौटने की स्थिति में थाने को जरूर सूचित करें।
महिलाओं की वापसी क्यों है चुनौती
पुलिस और विशेषज्ञों का मानना है कि कई महिलाएं स्वेच्छा से घर छोड़ती हैं, लेकिन सामाजिक डर, आर्थिक असहायता और पहचान का संकट उन्हें वापस लौटने से रोक देता है। किशोरियों के मामलों में कानूनी प्रक्रिया और अधिक जटिल हो जाती है, क्योंकि कानून उन्हें अपहरण की श्रेणी में रखता है।
सियासत भी हुई तेज
आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की कानून-व्यवस्था को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोला है। पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दावा किया कि जनवरी के पहले 15 दिनों में ही 807 लोग लापता हो गए। उन्होंने सवाल उठाया कि चार इंजन की सरकार के बावजूद राजधानी असुरक्षित क्यों है।
वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने भी बच्चों और बच्चियों के लापता होने के मामलों पर चिंता जताते हुए उपराज्यपाल को पत्र लिखकर विशेष टास्क फोर्स गठित करने की मांग की है।

