उत्तराखंड में बदला मौसम का मिजाज, बारिश-बर्फबारी से ठंड बढ़ी, कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी

उत्तराखंड में पहाड़ से लेकर मैदान तक मौसम ने अचानक करवट बदल ली है, जिससे लोगों को चौंकाने वाला बदलाव देखने को मिला। मंगलवार सुबह से ही प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का सिलसिला जारी है, जबकि केदारनाथ और यमुनोत्री धाम में लगातार बर्फबारी हो रही है।

मौसम विभाग के अनुसार आने वाले कुछ दिनों तक मौसम का यही रुख बने रहने की संभावना है। हल्की बारिश, बादलों की आवाजाही और ठंडी हवाओं के कारण तापमान सामान्य से नीचे रहने का अनुमान जताया गया है।

मौसम विज्ञान केंद्र द्वारा जारी पूर्वानुमान के अनुसार 8 अप्रैल को देहरादून, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल, चंपावत और ऊधमसिंह नगर के कुछ क्षेत्रों में बिजली चमकने, ओलावृष्टि और करीब 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज तूफान चलने की संभावना के चलते ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं अन्य जिलों में भी बिजली और तेज हवाओं को लेकर येलो अलर्ट घोषित किया गया है। तीन हजार मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की संभावना जताई गई है।

मंगलवार को रुक-रुककर हुई बारिश और ठंडी हवाओं के चलते अधिकतम तापमान में करीब 6 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई। दिन में कई बार बादल छाने से अंधेरा छाया रहा। जहां आमतौर पर अप्रैल के पहले सप्ताह में गर्मी बढ़ने लगती है, वहीं इस बार ठंड का अहसास बना हुआ है।

राजधानी देहरादून में दिनभर बादलों का डेरा रहा और बीच-बीच में हल्की से मध्यम बारिश होती रही। ठंडी हवाओं के कारण मौसम सुहावना बना रहा और लोगों को गर्मी से राहत मिली। सुबह और शाम के समय ठंड अधिक महसूस की गई, जिससे लोगों ने हल्के गर्म कपड़े पहनने शुरू कर दिए। दून में अधिकतम तापमान 25.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 6 डिग्री कम है, जबकि न्यूनतम तापमान 14.5 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 2 डिग्री कम है।

पश्चिमी विक्षोभ बना मुख्य कारण
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस बदलाव के पीछे पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता मुख्य कारण है। इसके प्रभाव से उत्तर भारत के पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में बादल छाए हुए हैं और बारिश हो रही है। साथ ही हिमालयी क्षेत्रों से आने वाली ठंडी हवाओं ने तापमान में और गिरावट ला दी है। पश्चिमी विक्षोभ अरब सागर और भूमध्यसागर से नमी लेकर आता है, जिससे बादलों का निर्माण होता है और वर्षा होती है। इसके कारण सूर्य की किरणें सीधे धरती तक नहीं पहुंच पातीं, जिससे तापमान में कमी आती है।