बोर्डिंग स्कूल छात्र से दुष्कर्म मामले में सजा बढ़ी आरोपी को सात साल कठोर कारावास….

Dehradun : शहर के एक बोर्डिंग स्कूल में 13 वर्षीय छात्र के साथ दुष्कर्म के मामले में अदालत ने बुधवार को अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी शक्ति सिंह की सजा को दो वर्ष से बढ़ाकर सात वर्ष कठोर कारावास कर दिया। इसके साथ ही आरोपी पर लगाए गए जुर्माने की राशि भी 10 हजार रुपये से बढ़ाकर 15 हजार रुपये कर दी गई है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में आरोपी को तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

यह मामला नवंबर 2011 का है। दिल्ली निवासी एक अभिभावक ने शहर कोतवाली थाने में इस संबंध में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार उनका 13 वर्षीय बेटा शहर के एक निजी बोर्डिंग स्कूल में कक्षा सात का छात्र था। दीपावली की छुट्टियों के बाद स्कूल लौटने पर विद्यालय के कर्मचारी शक्ति सिंह ने उसके साथ दुष्कर्म किया और घटना की जानकारी किसी को देने पर जान से मारने की धमकी दी।

धमकी और भय के चलते छात्र स्कूल से भागकर अपने पिता के परिचित के पास पहुंचा और पूरी घटना की जानकारी दी। इसके बाद मामला अभिभावकों और पुलिस के संज्ञान में आया। पुलिस ने जांच के बाद आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया।

इस मामले में 11 सितंबर 2023 को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम ने आरोपी शक्ति सिंह को दोषी ठहराते हुए दो वर्ष का कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।

दोनों पक्षों ने दायर की थीं अपीलें

निचली अदालत के फैसले के खिलाफ सत्र न्यायालय में दो अपीलें दाखिल की गई थीं। आरोपी शक्ति सिंह की ओर से सजा रद्द करने की मांग की गई, जबकि पीड़ित पक्ष ने सजा को आजीवन कारावास में परिवर्तित करने की अपील दायर की थी।

पॉक्सो एक्ट के तहत कड़ी सजा का प्रावधान

अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अरविंद कपील ने दलील दी कि बच्चों के साथ बढ़ते यौन अपराधों को रोकने के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2012 में बालकों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो एक्ट) लागू किया है, जिसमें इस तरह के अपराधों में न्यूनतम सजा 20 वर्ष तक निर्धारित की गई है। उन्होंने कहा कि निचली अदालत ने अपराध के पीड़ित पर पड़े मानसिक और भावनात्मक प्रभाव पर पर्याप्त विचार नहीं किया।

29 जनवरी को आत्मसमर्पण का आदेश

प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश महेश चन्द्र कौशिवा ने मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए कहा कि घटना के समय पीड़ित मात्र 13 वर्ष का बच्चा था और आरोपी स्कूल छात्रावास का कर्मचारी था, जिस पर बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी। अदालत ने माना कि निचली अदालत द्वारा दी गई सजा अपराध की प्रकृति के अनुरूप कम थी।

अदालत ने आरोपी शक्ति सिंह को 29 जनवरी 2026 को ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण करने के आदेश दिए हैं, ताकि उसे सजा भुगतने के लिए जेल भेजा जा सके।