

देहरादून। गोवंशीय पशुओं में लंपी रोग के बढ़ते खतरे को देखते हुए उत्तराखंड सरकार अलर्ट हो गई है। प्रदेश में एक जिले से दूसरे जिले और अन्य राज्यों से गोवंशीय एवं महिषवंशीय (भैंस) पशुओं के आवागमन पर रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही बीमारी की रोकथाम के लिए पशुओं का टीकाकरण तेज कर दिया गया है।
एक महीने तक प्रदर्शनी और पशु एकत्र करने पर रोक
विभागीय सचिव डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम की ओर से जारी आदेश के अनुसार अगले एक महीने तक राज्य में गोवंशीय एवं महिषवंशीय पशुओं की प्रदर्शनी, उन्हें एकत्र करने और इस तरह की अन्य गतिविधियों पर रोक रहेगी। विभाग के मुताबिक पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश समेत कुछ अन्य राज्यों में लंपी रोग तेजी से फैल रहा है। केंद्र सरकार के निर्देश के बाद राज्य में भी एहतियाती कदम उठाए गए हैं।
मच्छर और मक्खियों से फैलता है रोग
पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. उदय शंकर ने बताया कि लंपी रोग से संक्रमित पशुओं के शरीर पर दाने निकलने के साथ बुखार भी आता है। यह बीमारी मुख्य रूप से मच्छर और मक्खियों के काटने से फैलती है। हालांकि पशुओं में इस बीमारी की मृत्युदर करीब एक से दो प्रतिशत बताई गई है।
उन्होंने पशुपालकों से बचाव के लिए पशुओं के आसपास कीटनाशक का छिड़काव करने की अपील की है। साथ ही साफ-सफाई और मच्छर-मक्खियों की रोकथाम पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है।
12 सैंपल जांच के लिए भेजे
विभाग की ओर से पिछले तीन वर्षों से लंपी रोग की रोकथाम के लिए पशुओं का टीकाकरण किया जा रहा है। निदेशक डॉ. उदय शंकर ने बताया कि कुछ पशुओं में बीमारी के लक्षण सामने आने के बाद 12 सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।
सरकार और पशुपालन विभाग ने पशुपालकों से सतर्क रहने तथा पशुओं में बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल संबंधित विभाग को सूचना देने की अपील की है।
