

देहरादून। उत्तराखंड में जनता की शिकायतों के निस्तारण को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। सीएम हेल्पलाइन 1905 की समीक्षा के दौरान यह खुलासा हुआ कि 22,246 शिकायतों को अधिकारियों ने बिना उचित समाधान के जबरन बंद कर दिया। यह आंकड़ा सामने आने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कड़ी नाराजगी जताई।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि बिना जिलाधिकारी, विभागाध्यक्ष या संबंधित सचिव की संस्तुति के किसी भी शिकायत को बंद नहीं किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर किसी अधिकारी ने जबरन शिकायत बंद की, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

सचिवालय में आयोजित समीक्षा बैठक में सीएम ने कहा कि हेल्पलाइन सिर्फ एक फोन नंबर नहीं, बल्कि जनता के विश्वास का माध्यम है। उन्होंने निर्देश दिए कि शिकायतों का निस्तारण तभी माना जाए जब शिकायतकर्ता पूरी तरह संतुष्ट हो।
आंकड़ों के अनुसार, देहरादून में शहरी विकास (6,084) और पेयजल विभाग (2,980) से जुड़ी शिकायतें सबसे अधिक हैं। वहीं ऊधम सिंह नगर में राजस्व और खनन, जबकि हरिद्वार में खाद्य आपूर्ति और पुलिस विभाग से संबंधित शिकायतें शीर्ष पर हैं।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि जिलाधिकारी हर सप्ताह और सचिव स्तर पर हर महीने कम से कम दो बार शिकायतों की समीक्षा करें।
अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल
राज्य में कुल 1,19,077 शिकायतों में से करीब 18.68% शिकायतों को अनुचित तरीके से बंद कर दिया गया। आरोप है कि कई विभाग जवाबदेही से बचने के लिए गंभीर शिकायतों को दूसरी श्रेणियों में बदल रहे हैं।
जल संस्थान में पानी न आने की 861 शिकायतें जबरन बंद कर दी गईं, जबकि गैस सिलेंडर रिफिल और राशन कार्ड जैसी मांगों को शिकायत मानने से ही इंकार कर दिया गया। बिजली बिल और खराब मीटर से जुड़ी समस्याओं को भी तकनीकी प्रक्रिया में उलझा दिया गया।
विशेष रूप से जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक डीके सिंह के पास आई 2,074 शिकायतों में से 2,043 (98.5%) को बिना ठोस समाधान बंद कर दिया गया। वहीं पर्यटन विभाग में भी निस्तारण की दर बेहद कम पाई गई।
लंबित शिकायतों का बढ़ता अंबार
साल 2021 से अब तक 6,287 शिकायतें ऐसी हैं जो 180 दिनों से अधिक समय से लंबित हैं। इनमें राजस्व विभाग (472), वन विभाग (445) और लोक निर्माण विभाग (401) सबसे आगे हैं। कई शिकायतें वर्षों से प्रक्रिया में ही अटकी हुई हैं।
अक्तूबर-दिसंबर 2025 की तुलना में जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में लंबित शिकायतों में 107% की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि प्रक्रिया में रहने वाली शिकायतों में 2290% का उछाल देखा गया है।
अच्छा प्रदर्शन करने वालों की सराहना
मुख्यमंत्री ने बेहतर प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों से फोन पर बात कर उनका उत्साहवर्धन किया। इनमें उत्तरकाशी के अधिशासी अभियंता मनोज गुसाईं (99.09%), पौड़ी के अभिनव रावत (98.34%), ऋषिकेश के पूर्ति निरीक्षक सुनील देवली (98.30%), विकासनगर के एडीओ दीपक थापली (98.23%) और पटेलनगर के एसएचओ विनोद गुसाईं (97.41%) शामिल हैं।

