विक्रमादित्य बस्ती में आयोजित हुआ भव्य हिंदू सम्मेलन, समाज जागरण का दिया संदेश..

रुड़की में आयोजित हिंदू सम्मेलन में धर्म, संस्कृति एवं सामाजिक एकता को सशक्त बनाने का लिया संकल्प

विक्रमादित्य बस्ती स्थित आनंद स्वरूप आर्य सरस्वती विद्या मंदिर परिसर में आज एक भव्य हिंदू सम्मेलन का आयोजन श्रद्धा, उत्साह एवं गरिमामय वातावरण के बीच संपन्न हुआ। कार्यक्रम में क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं धर्मप्रेमी लोगों ने बड़ी संख्या में सहभागिता कर आयोजन को सफल बनाया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य समाज में धार्मिक चेतना, सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण तथा सामाजिक एकता को सुदृढ़ करना रहा।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में पूज्य महंत लोकेशदास जी महाराज ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन एवं जीवन मूल्यों पर आधारित संस्कृति है, जिसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी का दायित्व है। उन्होंने समाज में आपसी सहयोग, नैतिकता और धर्म के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर विशेष बल दिया।
प्रांत धर्म जागरण प्रमुख नारायण जी ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में समाज को संगठित रहने की आवश्यकता है। उन्होंने युवाओं से अपनी परंपराओं और संस्कारों को अपनाने का आह्वान करते हुए राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की प्रेरणा दी। वहीं विश्व हिंदू परिषद मातृशक्ति प्रांत सह संयोजक प्रीति ने मातृशक्ति की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि परिवार और समाज के संस्कारों की नींव महिलाओं से ही मजबूत होती है।
कार्यक्रम का संचालन संयोजक देवेंद्र टिकोला एवं अंकित गौतम द्वारा प्रभावी एवं सुव्यवस्थित रूप से किया गया, जिसकी उपस्थित जनों ने सराहना की। इस अवसर पर संरक्षक जलज गौड़, सुधाकर द्विवेदी, चेरब जैन, मंजू चौधरी, देवेश शर्मा, परवीन चौधरी, तिलक जी, अरुण, योगेश बंसल, आकाशदीप गौतम, योगेश चौहान, अजीत मिश्रा, इनु गोयल, अभिनव गोयल एवं संजय गुप्ता सहित अनेक सम्मानित नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
सम्मेलन के दौरान समाज में एकता, संस्कार एवं सेवा भावना को बढ़ावा देने का सामूहिक संकल्प लिया गया। अंत में आयोजकों द्वारा सभी अतिथियों एवं उपस्थित जनों का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम का समापन किया गया। यह आयोजन क्षेत्र में सामाजिक एवं धार्मिक जागरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।