मकर संक्रांति पर षटतिला एकादशी का दुर्लभ संयोग, खिचड़ी बिना रहेगा पर्व ?

Dehradun : 2026 के पहले प्रमुख त्योहार मकर संक्रांति की तिथि पर फिर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। 14 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन षटतिला एकादशी पड़ रही है, जिससे खिचड़ी बनाने पर पाबंदी लगेगी। पंडितों के बीच बहस छिड़ी है—कुछ अगले दिन खिचड़ी बनाने की सलाह दे रहे हैं, तो कुछ तिल-आधारित व्यंजनों पर जोर दे रहे हैं।

श्री बुद्धिबल्लभ पंचांग के संपादक आचार्य पवन पाठक ने स्पष्ट किया कि 14 जनवरी को दोपहर 3:07 बजे सूर्यदेव मकर राशि में प्रवेश करेंगे। लेकिन उसी दिन सुबह 3:18 से शाम 5:53 तक षटतिला एकादशी रहेगी। एकादशी पर चावल-आधारित भोजन वर्जित होने से पारंपरिक खिचड़ी नहीं बनेगी। “ऐसा संयोग 19 वर्ष बाद बन रहा है। इस दिन तिल, साबूदाना या फलाहार लें। अगले दिन खिचड़ी बनाना शुभ रहेगा,” उन्होंने कहा।

उत्तराखंड में मकर संक्रांति तिल, गुड़ और घी के लड्डू, खिचड़ी व स्नान-दान से मनाई जाती है। लेकिन एकादशी के कारण भक्त श्वेत तिल भगवान को अर्पित करेंगे। पाठक ने सलाह दी कि गंगा स्नान, कंबल-घी-तिल दान पुण्यकारी होगा। पर्व पर सूर्य-विष्णु पूजन विशेष फलदायी माने जाते हैं।

बीते वर्षों में पर्व तिथियों पर विवाद रहा—कई बार दो दिनों तक उत्सव चले। ज्योतिषाचार्य डॉ. सुशांत राज ने बताया कि इस बार मकर संक्रांति से शुभ कार्य शुरू नहीं होंगे। शुक्र अस्त होने से विवाह-मुहूर्त रुकेंगे। “दो फरवरी के बाद शुक्र उदय पर मांगलिक कार्य आरंभ होंगे।” यह खबर ग्रामीण क्षेत्रों में चर्चा का विषय बनी हुई है, जहां परिवार खिचड़ी-प्रसाद की तैयारी में उलझे हैं।

पंडितों ने अपील की कि पंचांग अनुसार ही पालन करें, ताकि धार्मिक महत्व बरकरार रहे।