बनभूलपुरा रेलवे भूमि मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई, पुनर्वास पर मांगी रिपोर्ट

नई दिल्ली/हल्द्वानी। हल्द्वानी के बनभूलपुरा रेलवे भूमि मामले में मंगलवार को Supreme Court of India में सुनवाई हुई। अदालत ने राज्य सरकार और याचिकाकर्ताओं दोनों पक्षों के तर्क सुने। मामले में पुनर्वास, मुआवजा और भूमि स्वामित्व को लेकर विस्तृत बहस हुई।

शिविर लगाकर पात्रों की पहचान के निर्देश

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पुनर्वास की योजना और प्रधानमंत्री आवास सहित अन्य योजनाओं की जानकारी दी गई। कोर्ट ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि 19 से 31 मार्च के बीच बनभूलपुरा क्षेत्र में शिविर लगाकर पात्र व्यक्तियों की पहचान की जाए। इसके बाद संबंधित रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में निर्धारित तिथि तक प्रस्तुत की जाए।

राज्य सरकार ने दाखिल किया हलफनामा

राज्य सरकार ने अपना हलफनामा भी कोर्ट में पेश किया। रेलवे और राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि कुल 13 मामले ऐसे हैं, जिनमें भूमि फ्रीहोल्ड श्रेणी की है और मुआवजा देने का प्रस्ताव रखा गया है। साथ ही यह भी कहा गया कि रेलवे भूमि से हटाए गए लोगों के लिए राज्य सरकार वैकल्पिक आवासीय व्यवस्था पर विचार कर रही है।

रेलवे का पक्ष

रेलवे की ओर से दलील दी गई कि जिन लोगों को हटाया गया, वे सार्वजनिक भूमि पर अवैध रूप से रह रहे थे और संबंधित भूमि रेलवे की संपत्ति है। रेलवे ने पुनर्स्थापन की मांग वाली याचिका को खारिज करने का अनुरोध किया।

याचिकाकर्ता का तर्क

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता Prashant Bhushan ने कहा कि प्रभावित लोगों की संख्या करीब 50 हजार है। उनका तर्क था कि कम ही लोग प्रधानमंत्री आवास योजना की पात्रता में आते हैं, इसलिए शेष परिवारों के पुनर्वास की स्पष्ट और व्यापक व्यवस्था की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित भूमि राज्य सरकार की है और 60-70 वर्षों से बसे लोगों की बस्तियों के नियमितीकरण पर विचार होना चाहिए।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि सार्वजनिक भूमि पर दावा किया जा रहा है। अगली सुनवाई में पुनर्वास, मुआवजा और भूमि स्वामित्व के कानूनी पहलुओं पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।