
सीमापार नदी सहयोग, जलवायु सहनशीलता और जल सुरक्षा पर वैश्विक मंथन
रुड़की। Indian Institute of Technology Roorkee ने National Institute of Hydrology के सहयोग से चौथे तीन दिवसीय रुड़की वॉटर कॉन्क्लेव 2026 का उद्घाटन किया। कॉन्क्लेव में विज्ञान और नीति के समन्वय से सीमापार नदी बेसिन सहयोग को सुदृढ़ करने तथा सतत विकास के लिए डेटा, जलवायु सहनशीलता और जल सुरक्षा के बीच मजबूत सेतु निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया गया। उच्च-स्तरीय पैनल चर्चाओं में सामुदायिक-केंद्रित जल सहयोग मॉडल विकसित करने पर भी विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।
उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. कमल किशोर पंत ने की। एनआईएच रुड़की के निदेशक डॉ. वाई.आर.एस. राव सह-अध्यक्ष रहे, जबकि संयोजक की भूमिका प्रो. आशीष पांडे ने निभाई।
विशेष सत्र में International Water Management Institute के महानिदेशक डॉ. मार्क स्मिथ और NITI Aayog के सदस्य डॉ. विनोद के पॉल सहित कई प्रतिष्ठित वक्ताओं ने अपने विचार साझा किए। पद्मश्री सम्मानित समाजसेवियों के प्रेरक उद्बोधन भी कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहे।
अपने संबोधन में प्रो. पंत ने कहा कि जल सुरक्षा का सीधा संबंध जलवायु सहनशीलता, खाद्य प्रणालियों और ऊर्जा स्थिरता से है। एआई-आधारित डेटा सेंटरों के बढ़ते उपयोग से जल की मांग में हो रही वृद्धि के संदर्भ में उन्होंने साक्ष्य-आधारित संवाद और वैश्विक साझेदारी की आवश्यकता पर जोर दिया।
कॉन्क्लेव में United States, Germany, United Kingdom, Israel, Netherlands, Canada, Japan, Norway, Sri Lanka, Thailand, Australia, Taiwan और Nepal सहित विभिन्न देशों से 42 से अधिक अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।
यह कॉन्क्लेव जल प्रबंधन के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग, नवाचार और नीति-निर्माण को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
